पंडित लख्मीचंद स्टेट यूनिवर्सिटी परफॉर्मिंग एंड विजुअल आर्ट्स (सुपवा) के नाम एक और बड़ा रिकॉर्ड दर्ज हुआ है। विवि के ऑडियोग्राफी विभाग ने उत्तर भारत में नया रिकॉर्ड बनाया है। लॉकडाउन के चलते विश्वविद्यालय में होने वाला हाईटेक तकनीकी प्रैक्टिकल एक एप के माध्यम से घर बैठे हुए विद्यार्थियों को सीखने को मिल रहा है। विभागाध्यक्ष देबाशीष राय ने बताया कि उन्होंने अपनी टीम के साथ मिलकर 45 दिन तक टीम व्यूवर एप पर विभिन्न तरह के प्रयोग किए। इस दौरान कई बार इसमें असफलता मिली। हर असफलता से सीख लेते हुए आखिरकार सफलता हासिल कर ली। अब इस एप के माध्यम से ही वह प्रैक्टिकल जो सिर्फ विवि की लैब में करना संभव हो सकता था, वह विद्यार्थियों को मोबाइल फोन पर बहुत ही आसानी से करवाया जा रहा है।
मुंबई, कोलकाता व हैदराबाद के संस्थानों ने सुपवा से साधा संपर्क
विभागाध्यक्ष देबाशीष राय ने बताया कि अप्रैल माह में सुपवा के कार्यकारी वीसी प्रोफेसर राजबीर सिंह ने वीडियो कांफ्रेसिंग के जरिये सभी विभागाध्यक्षों से यह पूछा था कि लॉकडाउन के चलते अब किस तरह से अपने विद्यार्थियों को आसानी से सब काम पूरा करवा सकते हैं। कुछ नया प्रयोग करने के लिए वीसी ने सभी विभागाध्यक्षों को प्रेरित किया था। इसी प्रेरणा से उन्होंने भी कुछ नया करने की ठान ली थी। इसके बाद उन्होंने अपनी टीम के साथ मई माह में टीम व्यूवर एप पर प्रयोग करना शुरू किया। करीब 45 दिन तक इस एप पर विभिन्न तरह के प्रयोग किए। हर प्रयोग में बहुत सी कमियां आती रही और उन कमियों से निखरते गए व जून माह के मध्य में यह प्रोजेक्ट सफल हुआ। 22 जून को वीसी ने इस प्रोजेक्ट का विभाग में फीता काटकर उद्घाटन किया। इसके बाद से मुंबई, कोलकाता व हैदराबाद के बड़े-बडे़ संस्थानों ने सुपवा से संपर्क कर उन्हें भी यह तकनीक सीखाने के लिए आग्रह किया है।
ऐसे काम करती है एप
प्ले स्टोर से टीम व्यूवर एप डाउनलोड किया गया। इसमें 45 दिन तक कई तरह के प्रयोग किए गए। इसके बाद विभाग के सभी विद्यार्थियों को इस एप को डाउनलोड करवाया गया। इसके बाद विभागाध्यक्ष द्वारा एक पासवर्ड छात्रों को दिया गया। पासवर्ड डालने के बाद विभागाध्यक्ष प्रैक्टिकल वर्क को कैंपस से बताते हैं, जोकि बिल्कुल ऐसा ही एप पर होता है। एप पर विद्यार्थी वैसा ही करते हैं, जोकि विभाग के स्टूडियो में होता है।
मैं मूल रूप से हांसी का रहने वाला हूं। लॉकडाउन के चलते विवि में भी आना मुमकिन नहीं था। वहीं, दूसरी ओर परीक्षा भी नजदीक थी। ऐसे में प्रैक्टिकल की चिंता लगातार सता रही थी। मगर गुरुजनों के इस प्रयास के बाद से सब आसान हो गया। सारा प्रैक्टिकल आसानी से पूरा हो रहा है।
- अंकुश आर्य, छात्र
मैं मूल रूप से जयपुर का रहने वाला हूं। थ्योरी वर्क तो हो गया था, मगर प्रैक्टिकल की चिंता थी। जो इस एप के माध्यम से खत्म हो गई है। यह एप बिल्कुल वैसे ही काम कर रही है, जैसे हम विभाग में करते थे।
- तन्मय भुटानी, छात्र