फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बीपी, शुगर जांच के बाद दी जा रही को-वैक्सीन की डोज

विज्ञापन
विज्ञापन
भारत बॉयोटेक की स्वदेशी को-वैक्सीन रिसर्च के तीसरे फेज में वालंटियरों को शामिल करने के लिए उनकी महज बीपी, शुगर जांच के साथ शरीर में कोरोना की एंटी बॉडी जांच के अलावा आरटी पीसीआर जांच की जा रही है। पहली दो फेज की रिसर्च की तुलना में तीसरी फेज को आसान बनाया गया है, क्योंकि पहले संस्थान अपनी लैब में जांच करने के बाद आईसीएमआर को सैंपल भेजता था। वहां से रिपोर्ट ओके आने के बाद ही वालंटियर को वैक्सीन दी जाती थी। पीजीआईएमएस में चल रही को-वैक्सीन रिसर्च के को-इन्वेस्टिगेट डॉ. रमेश वर्मा ने बताया कि मंगलवार को 30 और वालंटियरों को सफलता पूर्वक वैक्सीन की डोज दी गई है। इससे पहले 30 वालंटियरों को यह डोज लगाई जा चुकी है। फिलहाल संस्थान 140 वालंटियरों को और यह वैक्सीन लगाएगा। इसके बाद 800 से अधिक वालंटियरों को यह डोज दी जाएगी। प्रोफेसर डॉ. रमेश वर्मा ने बताया कि अभी तक हमारे सभी वालंटियर बिल्कुल सही हैं। हमारे पास 150 के करीब वालंटियरों का पंजीकरण हो चुका है। बीपी व शुगर की जांच में जो सामान्य मिलता है, उसके शरीर में एंटी बॉडी देखी जाती है और साथ ही कोविड-19 टेस्ट किया जाता है। सब सही मिलने पर वैक्सीन की डोज लगा दी जाती है। डोज देने के एक साल में सात से आठ बार सैंपल लिया जाता है। इसमें देखा जाता है कि वालंटियर के शरीर में एंटी बॉडी डोज बनी है या नहीं। तीसरे फेज में न्यूनतम 18 व अधिकतम 72 साल के बुजुर्ग को वैक्सीन लगाई जा चुकी है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें