रोहतक। प्रसिद्ध फिल्म लेखिका पुबाली चौधरी ने कहा कि सामान्य तौर पर स्क्रीनप्ले का एक पेज लगभग एक मिनट के स्क्रीन टाइम के बराबर माना जाता है। ऐसे में लेखक को बेहद सटीक और प्रभावशाली तरीके से लिखना पड़ता है।
कहा, स्क्रीनप्ले किसी भी फिल्म का ब्लूप्रिंट होता है जिस पर निर्देशक, निर्माता और कई बार दूसरे लेखक भी काम करते हैं इसलिए पटकथा लेखन में स्पष्टता और दृश्यात्मक सोच बेहद जरूरी है। वे दादा लख्मीचंद स्टेट यूनिवर्सिटी ऑफ परफॉर्मिंग एंड विजुअल आर्ट्स (सुपवा) में फिल्मी पटकथा लेखन की विशेष वर्कशॉप में छात्रों को स्क्रीनप्ले राइटिंग के व्यावहारिक तरीके सिखा रही हैं।
विज्ञापन
पुबाली चौधरी ने छात्रों को बताया कि स्क्रीनप्ले और उपन्यास लेखन में बड़ा अंतर होता है। उन्होंने कहा कि उपन्यास में लेखक पात्रों की भावनाओं को विस्तार से लिख सकता है। कुलपति डॉ. अमित आर्य ने कहा कि विश्वविद्यालय का उद्देश्य विद्यार्थियों को इंडस्ट्री की मांग के अनुसार प्रशिक्षित करना है।
रॉक ऑन और काई पो चे जैसी फिल्मों की लिख चुकी हैं पटकथा
फैकल्टी को-ऑर्डिनेटर महेश टीपी ने बताया कि पुबाली चौधरी हिंदी सिनेमा की जानी-मानी पटकथा लेखिका हैं। उन्होंने रॉक ऑन, काई पो चे और रॉक ऑन 2 जैसी चर्चित फिल्मों की पटकथा लिखी है। इनमें रॉक ऑन को राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार और काई पो चे को सर्वश्रेष्ठ स्क्रीनप्ले के लिए फिल्म फेयर अवॉर्ड मिल चुका है।