पीजीआईएमएस के अंदर एक साल के अंतराल में आयुष्मान भारत योजना के तहत आने वाले लाभ पात्रों के बिल क्लेम की संख्या 400 का आंकड़ा भी पार नहीं कर पाई। इसकी वजह जानने के लिए सिविल सर्जन ने जिला नोडल अधिकारी से जवाब मांगा है। चिकित्सा अधिकारी के अनुसार इस योजना में कहीं समस्या नहीं आनी चाहिए। लाभ पात्रों को क्या समस्या आ रही है, जिम्मेदार अधिकारी से बात कर समाधान कराया जाएगा।
प्रदेश के सबसे बडे़ चिकित्सा संस्थान पीजीआईएमएस में एक साल में 400 लाभ पात्रों को भी स्वास्थ्य लाभ नहीं मिल पाया है। जबकि 350 से अधिक लाभ पात्रों को जिला अस्पताल और निजी अस्पताल में स्वास्थ्य लाभ मिल चुका है। ऐसे में सवाल उठाया जा रहा है कि पीजीआईएमएस जैसे बडे़ संस्थान में मरीजों को इस सुविधा का लाभ क्यों नहीं मिल रहा है। सूत्रों की मानें तो पीजीआईएमएस में दवाओं की खरीद के चक्कर में मरीजों को उपचार देने में लेट लतीफ की जाती है, इसके चलते मरीज अपना उपचार स्वयं की जेब से करवा लेते हैं। इसके अलावा कई मरीज निजी अस्पतालों का रुख कर लेते हैं।
पीजीआईएमएस को लगभग चार पत्र भेजे जा चुके हैं कि वह आयुष्मान भारत योजना के लाभ पात्रों को समय पर उपचार दें। हर बार समस्या आती है, इसके लिए अधिकारियों को बोला गया है।
- डॉ. दिनेश गर्ग, जिला नोडल अधिकारी, आयुष्मान भारत योजना
आयुष्मान भारत योजना केंद्र सरकार की योजना है। इसका लाभ मिलने में कोई कोताही नहीं हो सकती। यदि किसी को समस्या आती है तो वह सिविल सर्जन कार्यालय में आकर अपनी शिकायत दे सकता है। इसके अलावा जिला नोडल अधिकारी से बात की जाएगी कि लाभ पात्रों की संख्या पीजीआईएमएस में कम क्यों है।
- डॉ. अनिल बिरला, सिविल सर्जन
यह है समस्या : पीजीआईएमएस में आने वाले मरीजों का पंजीकरण संबंधी सारा काम होने के बाद उसकी दवा आने तक इंतजार करने को कहा जाता है। पीजीआईएमएस काउंटरों पर तैनात आयुष्मान मित्र संस्थान की ही पालिसी बताते हैं। काउंटर के बाहर योजना की कोई नियमावली चस्पा नहीं है, इसके चलते लाभ पात्र वही बात मानते हैं जो उन्हें मौके पर बताई जाती है। इसके चलते लाभ पात्र कुछ बोल नहीं पाते और बगैर उपचार के ही वापस चले जाते हैं या स्वयं के खर्च पर उपचार करवाते हैं।