नागरिक अस्पताल में महिला के दांतों की जांच करते डाॅ. सुधीर। संवाद
रोहतक। कम उम्र में बच्चों के दूध के दांत नहीं टूटना समस्या बनती जा रही है। इसका मुख्य कारण बच्चों का अधिक फास्टफूड खाना बताया जा रहा है। इस वजह से दूध के दांत टूटने के बाद आने वाले दांत भी टेढ़े-मेढ़े निकल रहे हैं। नागरिक अस्पताल में इस तरह के रोजाना ऐसे मामले आ रहे हैं।
चिकित्सकों के अनुसार, फल व हरी सब्जी छोड़कर फास्टफूड का सेवन बच्चों की सेहत पर भारी पड़ रहा है। उनके दांत भी प्रभावित होने लगे हैं। दरअसल, नागरिक अस्पताल के दंत रोग विशेषज्ञ के पास रोजाना करीब 20 बच्चे इसी तरह की समस्या के साथ पहुंच रहे हैं। इनमें कम उम्र से ही ज्यादा बर्गर, पिज्जा, फ्रेंच फ्राइज, टॉफी-चॉकलेट खाना शामिल हैं।
इस कारण दूध के दांत टूटने में दिक्कत हो रही है। नागरिक अस्पताल के दंत विशेषज्ञ डॉ. सुधीर ने बताया कि बच्चे विटामिन व सामान्य भोजन नहीं खाने के कारण तीन से पांच साल की उम्र के बच्चों के दांत टूटने में दिक्कत आ रही है। पहले माता-पिता बच्चों को सामान्य भोजन दिया करते थे। इससे उनके दांत आराम से टूटे जाते थे।
अब सॉफ्ट खाना खाने से दांतों में एसिड बना शुरू हो जाता है। यह एसिड दांतों को काटना शुरू कर देता है। इससे दांतों में खाना जाम जाता है। यह दांतों की परेशानी और बढ़ा देता है।
दंत विशेषज्ञ डॉ. विकास ने बताया कि पहले बच्चे गन्ना, गाजर, मूली, फल खाया करते थे। इससे उनके दांतों में समस्या नहीं होती थी। अब बच्चे नर्म खाना खा रहे हैं। इलाज के बाद भी दांत टेढ़े-मेढ़े निकलते हैं।