गरनावठी में 5 साल के मासूम के अपहरण के बाद उसकी बेरहमी से हत्या की गई।
तूड़े से भरे कमरे में जब दरिंदे ने मासूम से जबरदस्ती की तो उसने हाथ-पैर
भी मारे। बच्चा शोर न कर सके, इसलिए दरिंदे ने उसके मुंह को तूड़े में ठूंस
दिया। पोस्टमार्टम में साफ हो गया है कि मुंह में तूड़ा ठूंसे जाने के
कारण गला रुकने से मासूम की मौत हुई। शुक्रवार को खूनी कमरे को पूरी तरह
खाली कर सबूत जुटाए गए।
यहां तूड़े में दो फुट नीचे खून से सनी ईंट, मासूम
की चप्पल, कुरकुरे का पॉकेट और गन्ने का टुकड़ा मिला है। कमरे में मिले
सबूत चीख-चीखकर मासूम के साथ हुई दरिंदगी की दास्तां बयां कर रहे हैं।
हालांकि गुपचुप चले सर्च अभियान में पुलिस ने सबूत तो जुटाए, लेकिन दो दिन
बाद भी आरोपियों तक नहीं पहुंचा जा सका है। तूड़े के कारण फुट और फिंगर
प्रिंट जुटाना मुश्किल हो रहा है। तूड़े में मिला गन्ने का टुकड़ा दो-तीन
दिन पुराना ही है।
मासूम की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में उसके सिर और हाथ पर
चोट के निशान मिले हैं। पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टरों की टीम ने कुकर्म
की बात से भी इंकार नहीं किया है। चोट के निशान मिलने से बच्चे के साथ
जबरदस्ती किए जाने का शक और गहरा गया है। हालांकि कुकर्म की सच्चाई जानने
के लिए डॉक्टरों ने विसरा को जांच के लिए मधुबन भेज दिया है। क्योंकि शव
पूरी तरह से सड़ चुका था। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही मामले में अन्य बातें
सामने आएंगी।
फिंगर प्रिंट मिलना मुश्किल, मोबाइल डिटेल पर टिकी आस
आरोपियों
तक पहुंचने के लिए फिंगर और फुट प्रिंट जुटाना पुलिस के लिए चुनौती साबित
हो रहा है। तूड़े के ऊपर से प्रिंट लेना काफी हद तक नामुमकिन है।
यदि जांच
टीम आसपास के क्षेत्र से भी फुट प्रिंट लेने का प्रयास करे तो वारदात स्थल
पर पहले ही सैकड़ों ग्रामीण इकट्ठा थे। पुलिस का मानना है कि दरिंदा मासूम
के आसपास रहने वाला है। इस कारण पुलिस की पूरी जांच गांव पर टिकी है। जिस
कोठड़े में शव मिला है, उसके मालिक से भी पूछताछ की जा रही है।
पुलिस टीम
वारदात वाले दिन कोठड़े के नजदीक प्रयोग होने वाले मोबाइल की लोकेशन भी
खंगाल रही है। मोबाइल लोकेशन से भी आरोपी तक पहुंचे जाने की उम्मीद है।