फर्क इससे नहीं पड़ता है कि बेटा-बेटी एक्टर, इंस्पेक्टर बने या डॉक्टर। जरूरी यह है कि समाज में लड़कियों को कैसा माहौल दिया जा रहा है, ताकि वह सुरक्षित महसूस कर पढ़ सकें। बेहतर समाज बनाने की इस लड़ाई को हम लड़कियां अकेले नहीं लड़ सकती है।
इसके लिए अपने माता-पिता, भाई और दोस्तों को शिक्षित करने की जरूरत है। उनकी रुढ़िवादी सोच बदलने की जरूरत है। यह बात बॉलीवुड अभिनेत्री हुमा कुरैशी ने ब्रेकथ्रू के ‘मिशन हजार’ अभियान के समारोह में बतौर मुख्यातिथि कही। वह सोमवार को एमडीयू के राधाकृष्णन सभागार में हुए राज्यस्तरीय समारोह में बोल रही थीं।
अभिनेत्री कुरैशी ने सबसे पहले सभागार में मौजूद नारी शक्ति को ‘नमस्कार’ किया। इसके बाद उन्होंने कहा कि वह करीब 18-19 साल की होंगी, जब एनजीओ ब्रेकथ्रू के साथ जुड़ी थीं। तब वह खुद महरून रंग का कमीज और काले रंग की सलवार पहनकर लिंग भेद और लिंग चयन के खिलाफ नाटक के जरिए ही लोगों को जागरूक करती थीं।
इस कार्यक्रम के नाटक को देखकर मुझे अपने गार्गी कॉलेज की याद आ गई। कुरैशी ने कहा कि मौजूदा समय में लड़कियों ने साबित कर दिया है कि वह लड़कों की तुलना में किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं हैं। अगर कार्य और पढ़ाई के क्षेत्र में उन्हें सुरक्षित माहौल दिया जाए तो वह उनसे और भी ज्यादा बेहतर कर सकती हैं।
इससे पहले, कुरैशी ने प्रदेश की अंतरराष्ट्रीय महिला खिलाड़ियों के साथ सिरसा की रोडवेज महिला चालक और गुलाबी ऑटो महिला चालकों को सम्मानित किया।