रोहतक। जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान 2016 में पूर्व वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु की कोठी जलाने के केस में शुक्रवार को पंचकूला की सीबीआई कोर्ट में सुनवाई हुई।
सीबीआई ने बचाव पक्ष की याचिका पर पुलिस की तरफ से दर्ज केस को वापस लेने से इन्कार कर दिया। अब याचिका पर 5 सितंबर को अदालत में सुनवाई होगी। उधर, पूर्व वित्तमंत्री के परिजनों की तरफ से दर्ज केस में शुक्रवार को सीबीआई के पुलिस अधीक्षक एमके पुरी की छह घंटे तक अदालत में गवाही हुई। अब बचाव पक्ष 8 व 9 मई को सवाल-जवाब करेगा।
2016 में जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान भड़की हिंसा में तत्कालीन वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु की रोहतक के विनय नगर स्थित कोठी आग के हवाले कर दी गई थी।
अर्बन एस्टेट थाने में पुलिस की तरफ से अज्ञात लोगों के खिलाफ कराई तो थी तो दूसरी वित्त मंत्री के परिवार की तरफ से कराई गई। परिजनों की ओर से कराई एफआईआर में 60 लोगों को नामजद कराया गया था।
बाद में प्रदेश सरकार ने केस सीबीआई को सौंप दिया। दोनों केस सीबीआई कोर्ट में चल रहे हैं। बचाव पक्ष के वकील जितेंद्र हुड्डा ने बताया कि परिजनों की तरफ से दर्ज केस में रोहतक की जुवेनाइल जस्टिस कोर्ट की तरफ से चार किशाेरों को बरी किया जा चुका है, जबकि पुलिस की तरफ से दर्ज केस को सीबीआई ने जुवेनाइल कोर्ट से वापस ले लिया था। उसी आधार पर बचे बालिग अभियुक्तों ने केस को वापस लेने की मांग थी।