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लिखित आश्वासन पर खत्म हुआ अनशन, अनशनकारी बोले, गो की बेकद्री हुई तो फिर बैठेंगे

Fri, 09 Sep 2016 01:25 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक
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भाजपा प्रदेशाध्यक्ष और गोसेवा आयोग के चेयरमैन ने गाय का दूध पिलाकर तुड़वाया अनशन - फोटो : amar ujala
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सड़कों पर घूम रहे बेसहारा गोवंश की रक्षा के लिए मंगलवार को शुरू हुआ साधु-संतों का आश्वासन बृहस्पतिवार को खत्म हो गया। भाजपा प्रदेशाध्यक्ष सुभाष बराला और गोसेवा आयोग के चेयरमैन भानीराम मंगला ने अनशन स्थल पर पहुंचकर संतों से बातचीत की। उन्हें विश्वास दिलाया कि 15 दिन में 1500 गोवंशों को सड़कों पर से हटा लिया जाएगा। इन सभी गोवंश को गोशालाओं में छोड़ने से पहले प्रबंधक द्वारा शपथ पत्र भी भरवाया जाएगा। इसके लिए सरकार के प्रतिनिधियों ने संतों को लिखित में आश्वासन भी दिया। 18 मिनट चली वार्ता के बाद बराला व मंगला ने चार संतों और एक समाजसेवी को गाय का दूध पिलाकर अनशन तुड़वाया। संतों का कहना है कि केवल आमरण अनशन खत्म हुआ है, आंदोलन नहीं। वे एक माह बाद बैठक करेंगे, जिसमें आंदोलन में मानी गई सभी मांगों पर हुए कार्यों की समीक्षा की जाएगी। बैठक के लिए प्रदेश की सभी गोशालाओं के प्रतिनिधियों, साधु-संतों, गोभक्तों और समाजसेवियों को शुक्रवार से ही निमंत्रण देना शुरू कर देंगे।
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गोवंश रक्षा आंदोलन के नेतृत्व में अंबेडकर चौक पर चल रहे आमरण अनशन के तीसरे दिन बृहस्पतिवार को सुबह से ही आसपास के गांवों के संत, व्यापारी संगठनों और गौशाला के प्रतिनिधि, खापों के प्रधान और समाजसेवी पहुंचना शुरू हो गए। महंत कपिलपुरी की अध्यक्षता में अनशन का तीसरा दिन शुरू हुआ। तीन दिन से आमरण अनशन पर चल रहे महंत कर्णपुरी, स्वामी परम चैतन्य, स्वामी विश्वेश्वेरानंद, समाजसेवी मंजुल पालीवाल के साथ करीब 50 गोभक्त भी भूख हड़ताल पर बैठे। सुबह 11 बजे भाजपा के जिला अध्यक्ष अजय बंसल सरकार का संदेश लेकर पहुंचे। बंसल ने कहा कि मांगें मान ली गई हैं। सरकार के प्रतिनिधि दोपहर में आकर लिखित में आश्वासन भी देकर जाएंगे। सुबह 11:37 बजे, गोरक्षा आंदोलन के अध्यक्ष संत गोपालदास भी समर्थन देने के लिए पहुंचे। दोपहर 1:30 बजे, मेयर रेनू डाबला और डिप्टी मेयर अशोक भाटी भी पहुंचे। मेयर ने आश्वासन दिया कि सरकार ने उनकी मांग मान ली है। नगर निगम गोशालाओं को प्रति गाय 50 रुपये के हिसाब से चारे का खर्चा देगा। संतों ने प्रभु भजन भी गाए। शाम 4:12 बजे, भाजपा प्रदेशाध्यक्ष और गोसेवा आयोग के चेयरमैन पहुंचे। 18 मिनट बातचीत के बाद सभी का अनशन तुड़वा दिया गया। इस अवसर पर संत थानेश्वर दास, संत कृष्ण सिंह, बाबा जयबीर नाथ, बाबा शेर नाथ, सुरेश पुरी, शंकर पुरी, प्रताप सिंह, भाड़े नाथ, पूनम आर्या, प्रवेश आर्या और शशि आर्या मौजूद रहे।


चैतन्य ने ली गायों की लिफ्टिंग की जिम्मेदारी

इधर, सड़कों पर घूम रहे 1500 गोवंश को लिफ्ट कराने की जिम्मेदारी जनसेवा संस्थान के अध्यक्ष स्वामी परम चैतन्य ने ली। वे जिस दिन से लिफ्टिंग कराना शुरू कर देंगे, उसी दिन से नगर निगम द्वारा चारे का खर्च भी देना शुरू कर दिया जाएगा।
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ये संत और व्यापारी बैठे भूख हड़ताल पर

बृहस्पतिवार को स्वामी कालीदास, स्वामी सोम प्रकाश, स्वामी शरणानंद, जोगेंद्र शास्त्री, डॉ. सुरेश राठी, गुलशन ईशपुनियानी शौरी मार्केट, मुकुंद लाल, राजकुमार, अमित महमिया, मनीष मित्तल, अनुज, सुरेंद्र कवातड़ा, अशोक कपूर, विक्की सहगल, संजय राठौड़, राजकुमार ढल, हरीश कुमार अरोड़ा, डीपी सिंधवानी, जय सहगल, इंद्रजीत भारद्वाज, भारतीय किसान यूनियन से धर्मबीर हुड्डा, ओमप्रकाश, गोबिंद राम सिंघल, गुलाबी ऑटो चालक प्रोमिला सहित 50 लोग भूख हड़ताल पर बैठे।

आप और खाप ने दिया समर्थन

आम आदमी पार्टी के प्रदेश संयोजक नवीन जयहिंद अपने कार्यकर्ताओं के साथ आंदोलन को समर्थन देने पहुंचे। हुडा खाप से रामकरण हुड्डा, नांदल खाप के प्रधान महेंद्र सिंह, दहिया खाप के प्रधान सुरेंद्र सिंह भी पहुंचे।

ये तीन मांगे मानी :-

- 15 दिनों में गोवंश सड़कों से हटाए जाएंगे।
- 1500 गोवंश को रखने की सहमति गौशालाएं दें।
- गोशालाओं को 50 रुपये प्रति गोवंश के हिसाब से भुगतान किया जाएगा।


गाय का नारा देकर सत्ता में आई भाजपा, अब मरने के लिए छोड़ा

भाजपा सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया है कि गाय के नाम पर वोट मांग कर भाजपा सत्ता में आई, लेकिन गाय को ही भूल गई। गाय की रक्षा और संवर्धन के दावे हवाई साबित हुए हैं। इस वजह से प्रदेश की जनता भी आज खुद को ठगा हुआ महसूस कर रही है। सरकार के खजाने में बहुत पैसा है और वे समय आने पर साक्ष्यों के साथ इसकी पोल भी खालेंगे। बृहस्पतिवार को अनशनकारियों को समर्थन देने के लिए गोरक्षा आंदोलन के अध्यक्ष संत गोपाल दास भी पहुंचे। उन्होंने कहा कि भाजपा ने नारा दिया था कि गाय बचेगी तो देश बचेगा, लेकिन आज गाय की जो हालत है, वह किसी से छिपी हुई नहीं हैं। जो गाय का सगा नहीं, वो किसी का सगा नहीं है। संत ने कहा कि सत्ता किसी के बाप की बपौती नहीं है। गाय की सुरक्षा और संवर्धन के दावे हवाई साबित हो रहे हैं। कभी गाय के नाम पर कैटवॉक कराते हैं तो कभी कुछ और। खुद कैसी वॉक करते हैं, यह सरकार को पता नहीं है। उन्होंने कहा कि सत्ता बदली, चेहरे बदले, लेकिन व्यवस्थाएं और भी ज्यादा बदतर हो गईं।

प्रदेश में चार लाख एकड़ है गोचर भूमि

संत ने कहा कि हरियाणा में करीब चार लाख एकड़ गोचर भूमि है। अगर पूरे देश की बात करे तो 3 करोड़, 32 लाख गोचर भूमि है। इसके बावजूद गाय सड़कों पर लावारिस घूम रही है। उसके लिए चारा नहीं है, इसलिए वह पॉलीथिन खा रही है। सरकार ने गोसेवा आयोग तो बना दिया है लेकिन हकीकत कुछ और ही है। यही वजह है कि राजस्थान की एक गौशाला में करीब एक लाख गाय चारदीवारी के अंदर ही मर गई थी।

पहरावर, पिंजरपोल व वैश्य गोशाला में जाएंगे गोवंश, 15 लाख का बजट बनेगा  

मेयर रेनू डाबला ने बताया कि शासन ने गोवंश पर 15 लाख रुपये खर्च करने की पावर डीसी के हाथ में दी है। इसको देखते हुए अधिकारियों ने साधु-संतों को आश्वासन दिया है कि वह जल्द ही शहर से गोवंश को पकड़वाकर गोशाला में भेज देंगे। गोशाला संचालकों के साथ बात भी हुई है। पहरावर की गोशाला में गाय को रखा जाएगा और वैश्य व पिंजरापोल गोशाला में सांड़ भेजे जाएंगे। इन सभी को देने के लिए 15 लाख रुपये का बजट तैयार कराया जाएगा। इसके लिए अधिकारियों से बात की जाएगी, जिससे जल्द काम शुरू हो सके।  

सांप्रदायिक राजनीति न करे सरकार

रोहतक। प्रदेश सरकार गौ संरक्षण के बजाय विरोधी वातावरण तैयार कर रही है, यह गलत है। यह बयान माकपा के पार्टी राज्य सचिव सुरेंद्र सिंह ने बृहस्पतिवार को जारी एक बयान में दिया। उन्होंने कहा कि मेवात के लोग भी बैल से खेती करते आए हैं और वह भी गो पालक समाज रहा है।

15 दिनों में कैसे गो वंश हटाएगी सरकार

वहीं, ललित मोहन सैनी ने कहा कि भाजपा की कथनी और करनी में अंतर है। जो कार्य सरकार 15 महीनों में नहीं कर पाई, वह 15 दिनों में कैसे करेगी? सूरज रसवंत ने कहा कि भाजपा गायों के साथ सौतेला व्यवहार कर रही है।
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