गौवंश की रक्षा पर सरकार और प्रशासन के रवैये से नाराज शहर के धर्मगुरु मंगलवार को सड़कों पर उतरे। धर्मगुरुओं ने गौरक्षा यात्रा निकालकर अंबेडकर चौक पर अनिश्चितकालीन आमरण अनशन शुरू कर दिया। पहले दिन तीन संत समेत चार लोग आमरण अनशन पर रहे।
धर्मगुरुओं ने चेताया कि जब तक शहर में घूमने वाले गौवंश के रहने की सरकार या प्रशासन कोई समुचित व्यवस्था नहीं करेगा, तब तक आमरण अनशन जारी रहेगा। गौरक्षा को लेकर शुरू हुए आंदोलन में शहर के विभिन्न सामाजिक और धार्मिक संगठन समर्थन में आ गए हैं। संतों के अनशन को समर्थन देने के लिए विधायक शकुंतला खटक भी पहुंची। वह काफी देर तक अनशन स्थल पर मौजूद रहीं।
पूर्व घोषणा के अनुसार, शहर के धर्मगुरु सुबह 10 बजे श्री गणेश दुर्गा भवन मंदिर में इकट्ठा हुए। इसके बाद धर्मगुरु और सामाजिक संगठन के प्रतिनिधि गौरक्षा यात्रा निकालते हुए अंबेडकर चौक पहुंचे। गौरक्षा यात्रा के दौरान सभी ने गौमाता के नारे लगाए और सड़कों पर घूमने वाले गौवंश की दुर्दशा के लिए प्रदेश सरकार और स्थानीय प्रशासन को जिम्मेदार ठहराया।
अंबेडकर चौक पर महामंडलेश्वर स्वामी कपिल पुरी की अध्यक्षता में आमरण अनशन शुरू किया गया। पहले दिन महामंडलेश्वर स्वामी विश्वेश्वरानंद महाराज, स्वामी कर्णपुरी महाराज, स्वामी परम चैतन्य और अभियान संयोजक मंजुल पालीवाल आमरण अनशन पर रहे। पालीवाल ने बताया कि इसके अलावा हरिओम सेवा दल के संस्थापक संजय खुराना और गणेश सेवा समिति के सदस्य भारत गिरधर क्रमिक अनशन पर रहे। धर्मगुरुओं ने कहा कि सरकार गौरक्षा के संबंध में कोई ठोस कदम नहीं उठा रही, जिस कारण गौवंश सड़कों पर मर रहे हैं।
कभी सड़कों पर गौवंश मर रहा है तो कभी दुर्घटना के कारण लोग मौत के मुंह में जा रहे हैं। मांग के बावजूद समुचित व्यवस्था नहीं की जा रही है। उन्होंने कहा कि आमरण अनशन तब तक जारी रहेगा, जब तक गौवंश के संरक्षण की समुचित व्यवस्था नहीं हो जाती। इस मौके पर स्वामी सोम प्रकाश, महंत थानेश्वर दास महाराज, कुमारी प्रवेश आर्या और पूनम आर्या आदि भी मौजूद रहे।
आमरण अनशन पर धर्मगुरु, अधिकारियों ने नहीं ली सुध
लावारिस गौवंश की रक्षा के लिए शहर में धर्मगुरुओं ने आमरण अनशन शुरू कर दिया, लेकिन स्थानीय प्रशासन बेसुध बना रहा। स्थानीय प्रशासन की तरफ से आमरण अनशन स्थल के आसपास पुलिस बल तो तैनात कर दिया गया, लेकिन देर शाम तक एक भी प्रशासनिक या नगर निगम का कोई अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा। इस अनदेखी के कारण भी धर्मगुरुओं में आक्रोश है।
ये संस्थाएं आई धर्मगुरुओं के साथ
डेरा लक्ष्मण पुरी, डेरा बाबा बालक पुरी, जनसेवा संस्थान, कालीदास आश्रम सांपला, विश्व हिंदू परिषद, बजरंग दल, मानव सेवा संघ, अखिल भारतीय बौद्धिक परिषद, हरिओम सेवा दल, सति भाई साईं दास सेवा दल, वैदिक सनातन धर्म सेवा समिति, भारत विकास परिषद रोहतक, विपुल हेल्प फाउंडेशन यूथ इंडिया एसोसिएशन, विश्व मैत्री महिला मंडल, स्नेह बिहारी सेवा समिति, श्री बालाजी युवा सेवा समिति, मां दानो देवी धर्मार्थ ट्रस्ट, बालाजी युवा संकीर्तन मंडल, भगवान परशुराम आश्रम, गौ ग्रास सेवा समिति, श्री शंकरा चार्य ट्रस्ट और बेटी बचाओ आंदोलन आदि संस्थाओं ने समर्थन दिया।
सड़कों पर लावारिस घूम रहे लगभग चार हजार गौवंश
अभियान संयोजक मंजुल पालीवाल ने बताया कि सरकार और प्रशासन की गौवंश की अनदेखी के चलते आमरण अनशन पर बैठना पड़ रहा है। आंकड़ों के अनुसार, शहर में लगभग चार हजार लावारिस गौवंश हैं, जिनकी सुध लेने वाला कोई नहीं है। जिले में लावारिस पशुओं के लिए आठ गौवंश हैं। इसके बावजूद लावारिस पशुओं की संख्या बढ़ती जा रही है।
जन-जन में जागा गौमाता प्रेम, क्या अब जागेगी सरकार
शहर में लावारिस घूमने वाले गौवंश को लेकर अब जन-जन सामने आ रहा है। मंगलवार को धर्मगुरुओं ने आमरण अनशन शुरू किया तो आम आदमी पार्टी भी गौवंश की रक्षा के लिए अभियान चला रही है। आपके अभियान का दूसरा चरण शनिवार को राज्यमंत्री मनीष ग्रोवर के घर के सामने खूटा गाड़कर किया जाएगा। सवाल यह है कि गौवंश को लेकर जिस तरह से धार्मिक, सामाजिक संगठन और राजनीति पार्टियां सामने आ गई हैं क्या उससे प्रदेश सरकार की नींद टूटेगी। क्या लावारिस गौवंश को कही आसरा मिल सकेगा?