किसानों ने सरकार से मांग की है कि जब तक किसान आंदोलन चल रहा है तब तक भाजपा और जजपा के सभी नेताओं के सार्वजनिक कार्यक्रम रद्द कर दिए जाएं। ताकि टकराव की नौबत न आए। भारतीय किसान यूनियन के प्रधान गुरनाम सिंह चढूनी की अगुवाई में मकड़ौली टोल प्लाजा पर हुई पंचायत में यह प्रस्ताव पास किया गया। दूसरे प्रस्ताव के तहत शनिवार की पुलिस कार्रवाई के खिलाफ सरकार को चेतावनी देते हुए रविवार दोपहर तीन बजे तक सड़कें बंद करने का फैसला किया गया।
चढूनी ने कहा कि लाठीचार्ज दुर्भाग्यपूर्ण है। किसान शांतिपूर्वक प्रदर्शन कर रहे थे और आगे भी करेंगे। लोगों में रोष है इसलिए सरकार को खुद ही आंदोलन तक अपने सारे कार्यक्रम रद्द कर देने चाहिए। सत्ताधारी सांसद, विधायक, मंत्री, सीएम, डिप्टी सीएम के सार्वजनिक कार्यक्रम रद्द करें। ये जानबूझ कर झगड़ा करवाना चाहते हैं ताकि कहीं दंगा-फसाद हो जाए और आंदोलन गलत मोड़ ले। इन्हें पता है कि लोग नाराज हैं, हर जगह विरोध हो रहा है, फिर भी क्यों जाते हैं। ये जानबूझ कर गुस्से में बैठे लोगों को छेड़ने आते हैं। उन्होंने कहा कि सरकार नहीं मानी तो छह अप्रैल को होने वाली संयुक्त किसान मोर्चा की बैठक में इनके सार्वजनिक कार्यक्रमों के बारे में कड़ा फैसला लिया जाएगा। चढूनी ने बताया कि पांच अप्रैल को सभी जिलों में दोपहर बारह से शाम छह बजे तक एफसीआई के दफ्तरों का घेराव किया जाएगा। सरकार एफसीआई को तोड़ने जा रही है। उससे किसानों की सब्सिडी तो बंद होगी ही, बीपीएल परिवारों को अनाज के बजाय नकद दिए जाएंगे, जिससे उन्हें भी काफी नुकसान होगा।
मई में होगा संसद कूच
चढूनी ने बताया कि 10 से 15 मई के बीच एक दिन संसद कूच का कार्यक्रम होगा, सभी जगह से इसकी मांग थी। इसमें किसानों के अलावा मजदूर, छोटे व्यापारी, युवा, पूर्व सैनिक, कर्मचारी, महिलाओं समेत सभी वर्गों के लोग शामिल होंगे। इसके लिए लोग वाहनों में दिल्ली की सीमा तक पहुंचेंगे, वहां से पैदल मार्च करेंगे। इस मार्च की अगुवाई महिलाओं का जत्था करेगा।
विपक्ष को पहले उठानी चाहिए थी आवाज
चढूनी ने कहा कि आज जो भी पार्टियां विपक्ष में हैं उन्हें बहुत पहले आवाज उठानी चाहिए थी। जब किसानों का आंदोलन शुरू हुआ था, उससे पहले ही विपक्ष को पुरजोर ढंग से यह मुद्दा उठाना चाहिए था। हाल ही में राज्य सरकार द्वारा बनाए आंदोलन के दौरान संपत्ति को हुए नुकसान की वसूली आंदोलनकारियों से करने संबंधी कानून को उन्होंने निंदनीय बताया। उन्होंने कहा कि ये तो अंग्रेजों से भी आगे निकल गए, लोकतंत्र में ऐसा थोड़े ही होता है। अब हमने टोल बंद किए हैं, ये आकर कह देंगे कि 400 करोड़ का नुकसान हो गया किसानों से वसूल कर लो।