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चैंपियनशिप रद, फिर भी बड़ा खेल खेल गए एमडीयू अधिकारी

Sun, 26 Jul 2015 02:22 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक
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एमडीयू का एक और कारनामा उजागर हुआ है।
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2013 में हुई जिस कोर्फबॉल चैंपियनशिप को फेडरेशन ने रद कर दिया, उसी चैंपियनशिप के आधार पर एमडीयू अधिकारी बड़ा खेल खेल गए।

इस चैंपियनशिप के आधार पर न केवल अपनी परिचित को स्पोर्ट्स कोटे में एडमिशन दिया गया, बल्कि सरकार की तरफ से दर्जनों खिलाड़ियों को स्कॉलरशिप भी बांट दी गई।

खास बात ये है कि एमडीयू के आला अधिकारियों ने रद की गई चैंपियनशिप के प्रमाण पत्र भी वापस तक नहीं मंगाए। आरटीआई एक्ट के तहत मांगी गई जानकारी में यह खुलासा हुआ है।
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ये था मामला
2013 में हरियाणा कोर्फबॉल एसोसिएशन ने एमडीयू में 26वीं सीनियर नेशनल कोर्फबॉल चैंपियनशिप और 13वीं सब जूनियर कोर्फबॉल चैंपियनशिप करवाई। चैंपियनशिप में एमडीयू के रजिस्ट्रार डॉ. एसपी वत्स अपने पद पर रहते हुए चेयरपर्सन भी बने थे। चैंपियनशिप पर सवाल उठने के बाद मामला हाईकोर्ट में पहुंचा और उस समय हाईकोर्ट ने यह कहते हुए चैंपियनशिप को चलने दिया कि इसका फैसला आगामी छह सप्ताह के अंदर एग्जीक्यूटिव काउंसिल की बैठक में होगा। उसी साल 28 सितंबर को दिल्ली में कोर्फबॉल फेडरेशन एग्जीक्यूटिव काउंसिल की बैठक में चैंपियनशिप को रद्द कर दिया गया। इसके बाद यही चैंपियनशिप सीनियर वर्ग के लिए चेन्नई और जूनियर वर्ग की नागपुर में करा दी गई।
आरटीआई में ये खुलासा
दरअसल, स्पोर्ट्स कोटे में 30 बच्चों पर एक सीट रिजर्व रहती है। इस सीट पर उसी विद्यार्थी को एडमिशन दिया जाता है जिसने एक साल के अंदर अखिल भारतीय विवि खेल बोर्ड द्वारा मान्यता प्राप्त नेशनल या इंटरनेशनल खेल में भाग लिया हो। एमडीयू के एक प्रोफेसर द्वारा मांगी गई आरटीआई में खुलासा हुआ कि इसी चैंपियनशिप को आधार मानते हुए ऑर्गेनाइज कमेटी में पदाधिकारी बने एमडीयू के एक प्रोफेसर ने सत्र 2014-15 में अपनी ही परिचित को एमफिल अंग्रेजी में एडमिशन दिला दिया। जबकि इस सीट के लिए आवेदन करने वाले यूनिवर्सिटी के गोल्ड मेडलिस्ट एक अन्य विद्यार्थी को एडमिशन से मना कर दिया गया। इसके अलावा चैंपियनशिप में भाग लेने वाले करीब दर्जन भर से ज्यादा खिलाड़ियों को तीन-तीन हजार रुपये की स्कालरशिप भी सरकार की तरफ से बांट दी गई।
इन सवालों के घेरे में यूनिवर्सिटी
आरटीआई खुलासे को देखें तो यूनिवर्सिटी प्रशासन पर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। पहला सवाल यह है कि जिस चैंपियनशिप को रद कर दिया गया और उसे किसी दूसरे स्थान पर भी करा दिया गया तो पहले वाली चैंपियनशिप के प्रमाण पत्र खिलाड़ियों से वापस क्यों नहीं लिए गए। दूसरा सवाल यह है कि चैंपियनशिप के प्रमाण पत्र को देखकर यह नहीं कहा जा सकता है कि यह किसी नेशनल चैंपियनशिप के प्रमाण पत्र होंगे, क्योंकि प्रमाण पत्र पर न कोई सीरियल नंबर, न रजिस्ट्रड नंबर, न खिलाड़ी का कोई फोटो, न ही एमडीयू का कोई चिन्ह और न ही प्रमाण पत्र पर खिलाड़ी के पिता का नाम है। तीसरा सवाल यह है कि जब चैंपियनशिप रद कर दी गई तो फिर खिलाड़ियों को स्कॉलरशिप किस आधार पर बांटी गई। खैर जो भी हो, लेकिन कहीं न कहीं इसमें बड़ा झोल जरूर है।
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वर्जन
चैंपियनशिप को गलत तरीके से कराया गया था। किसी भी चैंपियनशिप को कराने के लिए मीटिंग में कैलेंडर पास होता है, लेकिन इस चैंपियनशिप में ऐसा नहीं हुआ। हाईकोर्ट के आदेश पर फेडरेशन की एग्जीक्यूटिव काउंसिल की बैठक में इसे रद कर दिया था। रद होने के बाद प्रमाण पत्र की कोई मान्यता नहीं रहती।
- अशोक कुमार, वाइस प्रेसिडेंट कोर्फबॉल फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ।
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