जिले से हर दिन पांच से 10 हजार किलो पनीर पूरे प्रदेश में भेजा जाता
है। सैकड़ों टैंकर पेट्रोल और डीजल की खपत भी रोज होती है। यही नहीं, बाहर
से कई ट्रक फलों की डिमांड भी है। लेकिन, कुछ दिन के उपद्रव ने सबकुछ
बर्बाद कर दिया। कारोबारियों को करोड़ों का झटका लगा। पनीर की सप्लाई रुक
गई, पेट्रोल और डीजल के टैंकरों को उपद्रवियों से दूर सुरक्षित जगह
पहुंचाना पड़ा, हालांकि जाम में फंसे ट्रकों में रखे फल सड़ गए।
डिमांड पर नहीं हो सकी सप्लाई
कारोबारी
राजेंद्र कुमार ने बताया कि रोहतक से बाहर के बड़े-बड़े कारोबारी हर रोज
छह से सात सौ किलो पनीर की डिमांड करते हैं। उपद्रव शुरू होने से पहले कई
किलो पनीर तैयार था। कुछ जगह जाम में फंसने से पनीर खराब हो गया, वहीं शेष
बचा पनीर दुकान में ही सड़ गया। उपद्रवियों के डर से दुकानों को नहीं खोला
जा सका। कई दुकानों में पहुंचे उपद्रवियों ने पनीर को सड़क पर फेंक दिया।
पेट्रोल-डीजल के टैंकर और पंप बचाने में छूटे पसीने
सिविल
लाइन फिलिंग स्टेशन के मैनेजर नरेंद्र ने बताया कि हर रोज करीब साढ़े सात
लाख का कारोबार होता है। 19 से 23 तक पेट्रोल और डीजल के टैंकर नहीं आ पाए।
जो ईंधन फिलिंग स्टेशन में था उसे भी उपद्रवियों के डर से नहीं निकाला जा
सका। हालात ये हो गए कि फिलिंग स्टेशन को बचाने के लिए डटे रहना पड़ा।
उपद्रवियों का डर सताता रहा बावजूद स्टेशन और शहर की सुरक्षा मायने रखती
थी। एक बार उपद्रवियों ने पंप पर पथराव किया और आगजनी की कोशिश की लेकिन
निवेदन करने पर वे निकल गए। जो टैंकर जाम में फंसे थे उन्हें भी स्टेशन
संचालकों ने अनहोनी के चलते सुरक्षित जगह पहुंचाया। करीब पांच से 10 करोड़
रुपये के पेट्रोल-डीजल की खपत हर रोज होती है। ऐसे में पांच दिन फिलिंग
स्टेशन बंद रहने से करोड़ों का कारोबार प्रभावित हुआ।
सड़ गए फल, करोड़ों का घाटा
धींगड़ा
फ्रूट व्यवसायी सुभाष धींगड़ा ने बताया कि आंदोलन की वजह से फलों के ट्रक
शहर नहीं पहुंच पाए। तीन दिन से ज्यादा फंसे होने से कई ट्रक फल सड़ गए। जब
मंगलवार को ट्रक शहर पहुंचे तो फलों के सड़ने के डर से उन्हें सस्ते में
निकालना पड़ा। सुभाष ने बताया कि उनके खुद के अंगूर से लदे ट्रक झज्जर के
पास फंसे थे। जब जाम खुला तो अंगूर सड़ चुका था। कच्चे केले को भी सस्ते
दामों ने निकालना पड़ा। फल व्यवसायियों को करीब पांच से आठ करोड़ का नुकसान
हुआ है। कई व्यवसायी स्टोरेज में रखे फल भी उपद्रवियों के कारण नहीं निकाल
सके, सारे फल सड़ गए।