चौधर की जंग में लोग खूब पैंतरे लड़ा रहे हैं। गांव में सरपंची का पद एससी
बिरादरी के लिए आरक्षित हुआ तो चौधर के लिए नया जुगाड़ लगा दिया।
यूपी के
गोरखपुर से ब्याह कर लाई गई बहू मीना को सवर्ण परिवार ने चौधर की जंग में
उतार दिया है। जाट परिवार की बहू यूपी में अपने पिता की जाति के आधार पर
एससी के लिए आरक्षित गांव में चुनाव लड़ेगी। मामला हिसार रोड स्थित गद्दी
खेड़ी गांव का है। हालांकि महिला उम्मीदवार सरकार की सभी शर्तें पूरा कर
रही है।
परिवार जीत का दावा भी कर रहा है। तर्क है कि एससी बिरादरी के आठ
उम्मीदवार मैदान में खड़े हैं, जिनको अकेली महिला टक्कर दे रही है।
यूं बनाई योजना
जिले
के सोनीपत रोड स्थित भालौठ गांव में सबसे पहले ऐसा मामला सामने आया। यहां
भी जाट परिवार में प्रदेश से बाहर से लाई गई बहू को एससी के लिए आरक्षित
सीट पर उतारा गया।
इस गांव की खबर पढ़कर गद्दी खेड़ी परिवार ने यह योजना
बनाई। हालांकि गांव के युवक अनिल और गोरखपुर की लड़की मीना की शादी करीब
डेढ़ साल पहले की गई थी, लेकिन चुनाव लड़ने की योजना बनाने के बाद ही
आनन-फानन में मीना का वोट बनवाया गया और गोरखपुर से सभी कागजात जुटाए गए।
भालौठ से पूरी जानकारी लेने के बाद अनिल ने प्रशासनिक अधिकारियों से इस
बारे में जानकारी ली और सारे प्रमाण पत्र तैयार करवाए।
पहली बार आई एससी के लिए सरपंची
गद्दी
खेड़ी गांव में आजकल चौधर के लिए जंग छिड़ी हुई है। आखिर जंग छिड़े भी
क्यों नहीं? यहां पहली बार एससी को चौधरी बनने का मौका मिला, लेकिन उसमें
भी जाट ने ऐसा पेंच डाला कि मामला अटकता दिखाई दे रहा है। जाट परिवार में
ब्याह कर लाई गई अकेली महिला 8 एससी उम्मीदवारों को टक्कर दे रही है।
गांव
में लगभग 1854 वोट हैं, जिनमें लगभग एक हजार वोट जाट बिरादरी के हैं।
रविवार को होने वाला चुनाव तय कर देगा कि गांव बाहर से लाई गई बहू को
स्वीकारता है या एससी पुरुष को गांव की चौधर सौंपता है।