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जिग-जैग तकनीक में 65 लाख रुपये खर्च करने के बाद भी भट्ठा संचालकों को राहत नहीं

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रोहतक। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल की ईंट-भट्ठों पर 31 जनवरी तक लगाई गई रोक एनसीआर सहित प्रदेश भर के निर्माण कार्यों को प्रभावित कर रही है। ईंट-भट्ठे बंद होने के चलते ईंटों का भाव 4800 रुपये से 6200 रुपये प्रति हजार पहुंच गया है। भट्ठों की स्थिति यह है कि उनका पिछला सारा स्टॉक भी खत्म होने की कगार पर है, इसके चलते आने वाले समय में ईंटों की कीमतें और बढ़ सकती हैं। ईंट-भट्ठा संचालकों का दावा है कि आनेे वाले दिनों में ईंटों की भारी कमी हो जाएगी, क्योंकि काम न होने के चलते लेबर भी वापस जा चुकी है।
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जिले में 124 के करीब ईंट-भट्ठा चालू हालत में हैं। लेेकिन पर्यावरण प्रदूषण के स्तर को देखते हुए एनजीटी ने 31 जनवरी तक ईंट-भट्ठों के संचालन को प्रतिबंधित किया हुआ है। इस नियम के तहत एनसीआर क्षेत्र के 7200 के करीब ईंट-भट्ठे बंद पडे़ हैं। जिले की ईंट-भट्ठा एसोसिएशन के प्रधान अनूप सिंह दहिया के अनुसार वह इस समस्या को लेकर प्रदेश के सीएम व डिप्टी सीएम से भी मिल चुुके हैं। इसके बावजूद कोई समाधान नहीं निकला। प्रधान ने बताया कि गत वर्ष 4800 रुपये प्रति हजार ईंट की घर तक पहुंच थी, जोकि अब 6200 रुपये प्रति हजार का आंकड़ा पार करने जा रही है। बरसात होने व भट्ठों के बंद होने के चलते लेबर भी अपने घर वापस जा चुकी है। इसके चलते आने वाले समय में ईंटों की भारी कमी होगी। हर साल एक सीजन में एक ईंट-भट्ठा चार से पांच लाख ईंटों की बिक्री करता है, इसके अलावा कुछ स्टाक भी वह अपने पास रखता है। लेेकिन इन दिनों सभी भट्ठाें की स्थिति खराब हो गई है। दहिया ने बताया कि ईंट-भट्ठे बंद होने से हजारों परिवार भी आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं। एक ईंट-भट्ठे पर 350 परिवार के करीब काम करने आते हैं, इन सभी को इस बार खाली लौटना पड़ा है। सामान्य तौर पर ईंट-भट्ठा साल में दस माह चलता है। लेकिन इस साल नवंबर में ईंट-भट्ठा बंद कर दिया गया और 31 जनवरी तक बंद रहेगा। यह तिथि आगे भी बढ़ सकती है। ऐसी स्थिति में हमारे पास फरवरी, मार्च, अप्रैल व मई तक ही समय है और जून में बरसात होने के चलते काम फिर प्रभावित हो जाता है।
सवाल : ईंट-भट्ठे बंद ही करवाने थे क्यों लगवाए 65 लाख रुपये
जिला ईंट-भट्ठा एसोसिएशन के प्रधान अनूप सिंह दहिया ने सवाल उठाते हुए कहा कि यदि प्रदूषण के नाम पर भट्ठों को बंद ही करवाना था तो सरकार ने हर भट्ठे पर 65 लाख रुपये खर्च करवा कर जिग-जैग तकनीक से चिमनी क्यों बनवाई। 65-65 लाख रुपये खर्च करने के बाद भी भट्ठों को बंद करवा दिया गया। इस तकनीक का लाभ ही क्या है।
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बोले अधिकारी
एनजीटी के आदेशों पर 31 जनवरी तक जिले के सभी ईंट-भट्ठों को बंद रखने के निर्देश दिए गए हैं। अधिकांश ईंट-भट्ठों का स्टाक खत्म होने की कगार पर है। ईंट की मांग अधिक है और निर्माण कार्य बंद है। इसके चलते ईंटों की कीमत में कुछ उछाल आया है, जैसे ही भट्ठे चालू होंगे इनकी कीमत में सुधार आ जाएगा।
- अशोक शर्मा, जिला खाद्य आपूर्ति नियंत्रक
घर बनाना हुआ महंगा, ईंट से लेकर सीमेंट तक के बढे़ रेट
सांपला। बढ़ती महंगाई ने रसोई का बजट बिगाड़ने के अलावा घर निर्माण पर भी असर डाला है। सीमेंट, सरिया, क्रेशर, रेती आदि की कीमतों में काफी उछाल आया है। सबसे अधिक कीमत ईंटों की बढ़ी है। ईंटों के बनाने में कभी मौसम बाधा बनता है तो कभी एनजीटी के आदेश। बढ़ते प्रदूषण के कारण एनजीटी ने भट्ठों के संचालन पर रोक लगा रखी है। राजबीर सिंह, सतीश कुमार, अशोक आदि का कहना है अब मकान का निर्माण करना इतना आसान नहीं रहा। निर्माण सामग्री महंगी होने के चलते सरकारी व निजी काम प्रभावित हो रहे हैं।
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निर्माण सामग्री की कीमत रिटेल में
सरिया : लगभग 4000 रुपये क्विंटल
सीमेंट : 350 रुपये प्रति कट्टा
रेती : 32 रुपये प्रति फुट
पत्थर की टुकड़ी 34 रुपये प्रति स्कवेयर फुट
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