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Rohtak News: प्रदूषण बढ़ा रहा बीपी, एयर प्यूरिफायर में 8 घंटे की नींद से कर सकते हैं रिकवरी

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रोहतक। हवा में प्रदूषण का जहर लगातार घुल रहा है। यह हमारा बीपी बढ़ाने के साथ अन्य बीमारियां भी दे रहा है। ऐसे में एयर प्यूरिफायर में आठ घंटे की नींद के साथ हम रिकवरी कर सकते हैं। यह दावा किया गया है पीजीआईएमएस के पल्मोनरी विभाग के अध्ययन में। प्रदूषण में एयर प्यूरिफायर का असर जांचने के लिए चिकित्सकों ने 49 लोगों पर अध्ययन किया। इसमें अंबेडकर कॉलोनी, भिवानी रोड इलाके में रहने वाले 12 साल के बच्चे व 66 साल के बुजुर्ग शामिल रहे।
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दरअसल, प्रदूषण के चलते हवा की गुणवत्ता खतरनाक स्तर पर पहुंच गई है। यह चिंतनीय विषय है। शहर में एक्यूआई अधिकतम 700 तक पहुंच गया था। इस स्थिति में बीपी (ब्लड प्रेशर) बढ़ जाता है। इसकी वजह धूल कणों का शरीर में जाकर खून की नलियों को सिकोड़ देना है। ये कण खून के साथ अंदर नली में चिपक जाते हैं। इससे सांस लेने में तकलीफ होती है और बीपी बढ़ जाता है। इस स्थिति में हृदय घात का खतरा बढ़ जाता है। अध्ययन में एयर प्यूरिफायर प्रयोग करने पर बीपी कम पाया गया। हालांकि कोई भी एयर प्यूरिफायर मानकों के अनुरूप हवा गुणवत्ता को नहीं बना सकता है। फिर भी इसके प्रयोग से हम प्रदूषण का दुष्प्रभाव कुछ कम कर सकते हैं।
अध्ययन के तहत प्रदूषण के दौरान 15 दिन एयर प्यूरिफायर के प्रयोग व 15 दिन बिना प्रयोग के लोगों का स्वास्थ्य जांचा गया। इसमें सीआरपी की जांच की गई। प्रदूषण के समय सीआरपी अधिक मिला। एयर प्यूरिफायर प्रयोग करने पर इसमें कुछ कमी पाई गई, जबकि बगैर एयर प्यूरिफायर जांच में फिर से सीआरपी बढ़ा हुआ मिला। सीआरपी (सी-रिएक्टिव प्रोटीन) परीक्षण एक रक्त परीक्षण है। यह रक्त में सीआरपी के स्तर को मापता है।
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शरीर को 8 घंटे की रिकवरी बेहतर
पीजीआईएमएस के पल्मोनरी व क्रिटिकल केयर के डाॅ. पवन ने बताया कि दिनभर प्रदूषित वातावरण में रहने वाला व्यक्ति अपने कुछ घंटे बेहतर हवा में गुजार कर रिकवरी कर सकता है। रात को सोते समय 8 से 10 घंटे में अपने एयर प्यूरिफायर वाले कमरे में सोना बेहतर है। इसे दिनभर के नुकसान की भरपाई की जा सकती है। अध्ययन के तहत पीएम 2.5 शुरू में जांचने पर यह 440 पाया गया। इसके बाद 15 दिन एयर प्यूरिफायर प्रयोग किया तो यह 131 पहुंच गया, जबकि बगैर एयर प्यूरिफायर फिर 15 दिन जांच में यह दोबारा बढ़कर 414 पहुंच गया।

प्रदूषण खतरनाक स्तर पर बना हुआ है। यह दमा, अस्थमा, आईएलएल, सीओपीडी व अन्य रोगों के पीड़ितों की परेशानी बढ़ाने वाला है। इस कारण भर्ती करने की जरूरत वाले मरीज बढ़ गए हैं। ऐसे अब 10 से 12 केस आ रहे हैं। पहले ये मुश्किल से एक या दो मरीज ही होते थे। एयर प्यूरिफायर के अध्ययन में अंबेडकर कॉलोनी से 27 व भिवानी रोड से 22 लोगों को शामिल किया गया।
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-डॉ. ध्रुव चौधरी, अध्यक्ष, पल्मोनरी एवं क्रिटिकल केयर, पीजीआईएमएस।

जांच पहले एयर प्यूरिफायर के साथ एयर प्यूरिफायर के बाद
सीआरपी 7.9 4.2 7.1
बीपी 135 129 131
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