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इंद्रेश बोले, किताबों से व्यक्ति शिक्षित हो सकता है, पर अच्छा इनसान नहीं बन सकता

Mon, 25 Jan 2016 02:06 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक
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हम दुनिया में शैतान बनने नहीं, बल्कि भगवान जैसे बनने आए हैं। जाति भगवान ने दी है, यह ईश्वर प्रदत्त है। जो लोग दूसरों को अछूत, नीच, दलित कहते हैं, वह पाप करते हैं, यह भगवान को कोसने के बराबर है। छूआछूत कभी धर्म नहीं था। हमें अपना दिल, दिमाग, मंदिर, तालाब और कुएं सबके लिए खोलने होंगे। किताबों से व्यक्ति शिक्षित तो हो सकता है, लेकिन अच्छा इनसान नहीं बन सकता।
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 यह बात आरएसएस के अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य इंद्रेश ने कही। वे आरएसएस संपर्क विभाग की ओर से प्रबुद्ध नागरिक विचार गोष्ठी में बतौर मुख्य वक्ता शामिल हुए थे।

पीजीआई के डेंटल कॉलेज सभागार में हुई इस गोष्ठी में विभिन्न सामाजिक विषमताएं एवं समाधान विषय पर इंद्रेश ने खुलकर विचार रखे। समस्याओं के दौरान उन्होंने विपक्षी पार्टियों को भी बगैर नाम लिए कोसा।
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उन्होंने राम मंदिर, धर्मांतरण, असहिष्णुता, भ्रूण हत्या, सहित कई मसलों पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि समाज में भ्रूण हत्या, नशा, घरेलू हिंसा, प्रदूषण, आतंकवाद, नक्सलवाद, दंगे फसाद, गरीबी, भुखमरी, जातिवाद, पंथवाद, भाषावाद, लिंगभेद, रंगभेद जैसे राक्षस मौजूद हैं।

इनका समाधान निकालने के लिए हर फील्ड के विद्वान ने अपने-अपने विषय की किताबों को खंगाला लेकिन किताबें इन समस्याओं का समाधान नहीं बता सकतीं।

किताबों से व्यक्ति शिक्षित तो हो सकता है, लेकिन अच्छा इनसान नहीं बन सकता। उन्होंने कहा कि सिस्टम ने मुझे इंजीनियर तो बना दिया लेकिन अच्छा इनसान बनाने का कोई सिस्टम ही नहीं है। उनका कहना था कि सामाजिक विषमताओं या समस्याओं को गुस्से, भय, शंका ग्रस्त होकर दूर नहीं किया जा सकता है। हिंसा से किसी भी समस्या का समाधान नहीं निकाला जा सकता है।

 जब-जब भारत को गलत रास्ते पर चलाने की कोशिश की गई है तब-तब बुद्धिजीवियों ने इसे सही मार्ग दिखाया है। उन्होंने कहा कि अपना दिल, दिमाग, मंदिर, तालाब और कुएं सबके लिए खोलने होंगे। छुआछूत कभी भी धर्म, पुण्य और सत्य नहीं था। पहले भी अपराध था और आज भी अपराध है। राम ने भी शबरी व जटायु के माध्यम से समता का संदेश दिया था।

धर्मांतरण को बंद करना होगा
इंद्रेश कुमार ने धर्मांतरण को मानवता का दुश्मन बताते हुए कहा कि धर्मांतरण का इस्तेमाल साम्राज्यवाद और विस्तारवाद के लिए किया जाता रहा है। यह सभ्य समाज के लिए रोग है। साम्राज्यवाद और विस्तारवाद स्वतंत्रता का अपहरण करता है। वर्ग संघर्ष तभी रुकेगा जब धर्मांतरण बंद होगा।

लेडी-मैडम के साथ महिलाएं सुरक्षित नहीं
मुख्य वक्ता इंद्रेश ने कहा कि लेडी और मैडम जैसे शब्दों के साथ महिलाएं सुरक्षित नहीं हैं। लेकिन मदर, सिस्टर और डॉटर के साथ कोई समस्या नहीं है। दुनिया ने प्रेम को व्यापार बनाया तो एक त्योहार वेलेंटाइन-डे के रूप में जन्मा। हमारे यहां प्रेम पवित्र है इसलिए यहां उत्सवों का जन्म होता है। होली और रक्षा बंधन जैसे उत्सव।

यह भी थे वक्ता
शाम पांच बजे शुरू हुई गोष्ठी में मुख्यातिथि पीजीआई के डायरेक्टर डॉ. राकेश गुप्ता, विशिष्ट अतिथि हेल्थ यूनिवर्सिटी के कुलपति डॉ. ओपी कालड़ा थे। जबकि अध्यक्षता एमडीयू के कुलपति डॉ. बिजेंद्र कुमार पूनिया ने की।

तीनों ने उद्बोधन भी दिया। इस मौके पर सीताराम व्यास, प्रांत सह कार्यवाहक प्रताप सिंह, प्रदेश संपर्क प्रमुख सुभाष आहूजा, प्रांत प्रचारक सुधीर, एमडीयू के रजिस्ट्रार जितेंद्र भारद्वाज, विधायक मनीष ग्रोवर, स्वामी परम चैतन्य, विभाग प्रचारक राजेश, रमेश सचदेवा, मंजुल पालीवाल सहित खासी तादाद में लोग मौजूद रहे।
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