लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की शानदार वापसी से पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा न केवल अपने गढ़ देशवाली बेल्ट में मजबूत हुए हैं, बल्कि प्रदेश की बागड़ व जीटी रोड बेल्ट में भी तीर निशाने पर लगा है। अहीरवाल बेल्ट में कांग्रेस भाजपा को कड़ी टक्कर देने में कामयाब रही जबकि पांच साल पहले प्रदेश में कांग्रेस से सफाया हो गया था।
प्रदेश के अंदर राजनीति को क्षेत्र के हिसाब से छह भागों में बांटा जाता है। एक तरफ पंचकूला से लेकर पानीपत तक जीटी रोड बेल्ट है। इससे आगे देशवाली बेल्ट है, जिसमें रोहतक, झज्जर व सोनीपत जिला आता है। फरीदाबाद से लेकर नारनौल तक यादव बाहुल्य दक्षिण हरियाणा की अहीरवाल बेल्ट है। भिवानी, हिसार व सिरसा बागड़ बेल्ट में आते हैं जबकि जींद, कैथल व फतेहाबाद का इलाका बांगर बेल्ट कहलाता है।
इसके अलावा फरीदाबाद व पलवल का क्षेत्र है, जो यूपी से सटा है। देशवाली बेल्ट की सीट रोहतक व सोनीपत में जीत हासिल कर हुड्डा ने कांग्रेस की ताकत दिखाई। बागड़ बेल्ट में हिसार व जीटी रोड बेल्ट में अंबाला में कांग्रेस प्रत्याशी की जीत से हुड्डा का कद ही बढ़ा है क्योंकि उन्होंने ही प्रत्याशियों को टिकट दिलवाया था।
अहीरवाल बेल्ट में चूके हुड्डा, भाजपा को मिली कड़ी टक्कर
प्रदेश की अहीरवाल बेल्ट की सीट भिवानी-महेंद्रगढ़ व गुरुग्राम के अलावा फरीदाबाद में हुड्डा की पसंद के प्रत्याशियों को कांग्रेस आलाकमान ने टिकट दिया था। तीनों सीटों पर भाजपा जीत हासिल करने में कामयाबी रही। हालांकि कांग्रेस ने गुरुग्राम व भिवानी-महेंद्रगढ़ में कड़ी टक्कर दी है।
डी पार्क पर पहुंचे प्रदेश भर से कांग्रेसी, विस चुनाव में टिकट के दावेदार लगा रहे हाजिरी
पांच साल पहले भाजपा ने सभी प्रदेश की 10 लोकसभा सीट जीती थीं। अब कांग्रेस ने पांच सीट जीतकर वापसी की है। अक्तूबर में विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में कांग्रेस को सरकार बनने की उम्मीद है। इसमें भूपेंद्र सिंह हुड्डा को मुख्यमंत्री का दावेदार माना जा रहा है। ऐसे में टिकट के इच्छुक कांग्रेस रोहतक के डी पार्क स्थित पूर्व मुख्यमंत्री के आवास तक दौड़ लगा रहे हैं।
39 साल बाद चखा रोहतक ने चौधर का स्वाद
सबसे पहले 1966 में पंडित भगवत दयाल शर्मा प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री बने, जो पुराने रोहतक के बेरी कस्बे से थे। वह मात्र 143 दिन ही सीएम की कुर्सी पर रह सके। उसके बाद 1967 से लेकर 2005 तक रोहतक के हाथ चौधर नहीं लगी। लंबे समय तक तीन लाल का दबदबा रहा। भिवानी से बंसीलाल, सिरसा से देवीलाल व उनके बेटे ओमप्रकाश चौटाला व हिसार के आदमपुर से भजनलाल 39 साल तक मुख्यमंत्री रहे। हालांकि बीच में बनारसी दास गुप्ता, राव बीरेंद्र सिंह व हुकम सिंह भी मुख्यमंत्री बने, लेकिन कार्यकाल लंबा नहीं रहा।