पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा और कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष डॉ. अशोक तंवर के बीच चल रही खींचतान के मसलों का खंडन करते हुए तंवर ने स्पष्ट कहा है कि कांग्रेस में कोई गुटबाजी नहीं है। आलाकमान से जो आदेश मिलते हैं, पदाधिकारी और कार्यकर्ता उसी हिसाब से संबंधित कार्यक्रम में उपस्थित होते हैं। पूर्व सीएम हुड्डा की चंडीगढ़ में बैठक थी, उन्होंने अपने निजी लोगों को बुलाया था। इसमें उनके नहीं शामिल होने को गुटबाजी नहीं कहा जा सकता।
अशोक तंवर शनिवार को पुराने बस स्टैंड के समीप कम्यूनिटी सेंटर में पूर्व गृहमंत्री सुभाष बतरा के रिश्तेदार डॉ. ओमप्रकाश अलावादी की रस्म क्रिया पर शामिल होने आए थे। उन्होंने कहा कि सूबे के डीजीपी ने जो कहा, वह सही नहीं है। यदि हर कोई अपने हाथ में कानून लेगा तो व्यवस्था कैसे बनेगी। भाजपा को घेरते हुए तंवर ने कहा कि जाट आंदोलन के दौरान हुई हिंसा को प्रदेश सरकार रोकने में नाकाम रही, अब जिम्मेदारी भी लेने से भाग रही है। भाजपा के शासन को दो साल होने जा रहे हैं, लेकिन जनता नाखुश है। जाट आरक्षण की हिंसा की जांच के लिए सरकार द्वारा गठित कमेटी पर सवाल उठ रहे हैं। स्वयं कमेटी का कहना है कि पुलिस खोखली है, जिम्मेदारी छोटे अधिकारी से बडे़ अधिकारी और नेताओं की भी है। लेकिन छोटे कर्मचारियों पर ही कार्रवाई हो रही है। वकील सुदीप कलकल को बताया जा रहा है कि वह कांग्रेसी है, जबकि ऐसा नहीं है। सब जानते हैं कि वह भाजपा से जुड़ा है। जाट आरक्षण के मामले में भी भाजपा बैकफुट पर है। आरक्षण बिल यदि मजबूती से रखा गया होता तो आज यह स्थिति नहीं होती। भाजपा की कार्यप्रणाली से प्रदेश की जनता दुखी है। यही वजह है कि अब जनता कांग्रेस से जुड़ रही है, इसका उदाहरण हाल ही में हुए चुनाव हैं। डेढ़ साल के अंतराल के बाद एक बार फिर आमजन कांग्रेस से जुड़ना शुरू हो गया है।