रोहतक। बेटियों के प्रति समाज की सोच बदल रही है। बेटियों के जन्म पर भी अब उतनी ही खुशी मनाई जाने लगी है जितनी बेटों के जन्म पर मनाते हैं। जिले का भैंणी चंद्रपाल गांव यह नजीर पेश कर रहा है। यहां के घरों में बेटों से ज्यादा बेटियों की किलकारियां गूंजती हैं। यह गांव कन्या भ्रूण हत्या करने वालों को आईना भी दिखा रहा है।
इस साल के अब तक के आंकड़ों पर नजर डालें तो भैणी चंद्रपाल में 1000 लड़कों पर 1500 लड़कियां हैं। जिला मुख्यालय से करीब 35 किलोमीटर की दूरी पर यह गांव है और इसकी जनसंख्या भी 10 हजार से अधिक हैं। खुशी देने वाला यह आंकड़ा केवल सरकारी प्रयास नहीं बल्कि ग्रामीणों के दृष्टिकोण में आ रहे बदलाव की बानगी भी पेश कर रहा है। रामरति और पिंकी यहां की महिला सरपंच भी रही हैं।
गांव निवासी युद्धवीर सिंह मास्टर व दीपक का कहना है कि यहां पर बेटों की भांति ही बेटी के जन्म पर भी सामान रूप से खुशी मनाई जाती है और कुआं पूजन भी किया जाता है। ग्रामीणों की ओर से बेटा और बेटी को समान दृष्टि से देखा जाता है। बेटियों को भी घर की शान माना जाता है। वहीं, ग्राम पंचायत भी जागरूकता बढ़ा रही है।
ग्राम पंचायत के अलावा महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से आंगनबाड़ियों में परिवार संग बेटियों का जन्मदिन धूमधाम से मनाया जाना भी इसमें सहायक है। वहीं, स्वास्थ्य विभाग के प्रयास भी रंग ला रहे हैं। जिसमें भ्रूण जांच के प्रति सख्ती भी शामिल है। संवाद
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समाज में बदलती सोच के चलते बेटियों के प्रति सम्मान और स्नेह में वृद्धि हो रही है। अब बेटियों के जन्म पर भी अनेक घरों में उतनी ही खुशी मनाते हैं, जितना बेटों के जन्म पर होती है। इन्हीं बदलावों का परिणाम है कि कई स्थानों पर बेटियों की संख्या बेटों से अधिक हुई है।
- दीपिका सैनी, जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी, रोहतक
सामूहिक प्रयासों से ग्रामीणों जागरूकता बढ़ी है। कन्या भ्रूण हत्या के प्रति लोगों को पंचायत में भी जागरूक किया जाता है। आंगनबाड़ी केंद्रों में बेटियों का जन्मदिवस सामूहिक रूप से मनाया जाता है। स्वास्थ्य विभाग के प्रयास भी सार्थक हो रहे हैं।
- यशवीर सिंह, सरपंच, गांव भैंणी चंद्रपाल