विजेंद्र कौशिक
रोहतक। शहर के पटेल नगर की बेटी ज्योति बोहत सात फेरे लेने से पहले पति दीपक के साथ सात संकल्प लेंगी। न केवल दूल्हा व दुल्हन रक्तदान करेंगे, बल्कि नेत्रदान का भी संकल्प लेंगे। शनिवार को ‘आप और हम’ सामाजिक संस्था के पदाधिकारियों के साथ युगल पीजीआई पहुंचा और थैलेसीमिया की जांच करवाई।
ज्योति ने बताया कि बचपन से ही उसके मन में समाज को जागरूक करने व सामाजिक कार्यों में भाग लेने की इच्छा रही है। यही कारण है कि 9 साल पहले वह एमटीएफसी सामाजिक संस्था के साथ जुड़ीं। संस्था दूसरी संस्थाओं के साथ मिलकर सामाजिक कार्यों में भाग लेती रही है। आम लोगों को रक्तदान के लिए प्रेरित करने के लिए दो साल पहले गठित संस्था आप और हम के सदस्य मिले। बताया कि 10 दिन पहले पीजीआई में थैलेसीमिया से ग्रस्त 23 बच्चों को ए-पॉजिटिव रक्त चढ़ाया जाना था, लेकिन ब्लड बैंक में मात्र नौ यूनिट रक्त उपलब्ध था। संस्था ने ए-पॉजिटिव ग्रुप के 30 युवाओं को एकत्रित किया और पीजीआई के ब्लड बैंक में ले जाकर रक्तदान कराया। इस तरह की दिक्कत दोबारा न आए, इसलिए ज्यादा से ज्यादा लोगों को रक्तदान के लिए प्रेरित करने व शादी से पहले थैलेसीमिया की जांच कराने का निर्णय लिया। ज्योति की शादी चरखी दादरी के दीपक के साथ तय हुई है।
सात फेरों से पहले दूल्हा-दुल्हन ये लेंगे सात संकल्प
: शादी से एक दिन पहले रक्तदान।
: थैलेसीमिया की जांच।
: नेत्रदान का भरा जाएगा संकल्प पत्र।
: शादी पर पौधरोपण।
: शादी समारोह में नहीं करेंगे प्लास्टिक के बर्तनों का प्रयोग।
: भ्रूण हत्या न करने का लेंगे संकल्प।
: शादी में खाना व्यर्थ न जाए, इसका रखा जाएगा ध्यान।
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जहां ज्योति पढ़ी, उसी स्कूल में लगेगा रक्तदान शिविर
ज्योति ने बताया कि उसने 12वीं तक की पढ़ाई गांधी कैंप स्थित गर्ल्स सीनियर सेकेंडरी स्कूल से की है। शादी से एक दिन पहले उसी स्कूल में 10 जुलाई को रक्तदान शिविर लगाया जाएगा। रक्तदान के लिए शादी के कार्ड के साथ बोहत व एमटीएफसी परिवार की तरफ से रक्तदान के लिए भी अलग से कार्ड भेजा गया है। साथ ही शिविर में हम और आप सोशल वेलफेयर सोसायटी, मां दानो देवी धर्मार्थ ट्रस्ट, पालिका बाजार एसोसिएशन व हरिओम सेवा दल भी सहयोग कर रहा है। शिविर सुबह 9 से दोपहर बाद 2 बजे तक चलेगा।
पीजीआई पहुंचा युगल, थैलेसीमिया की कराई जांच
शनिवार को ज्योति व दीपक सामाजिक संस्थाओं के साथ पीजीआई पहुंचे। दोनों ने पहले तो थैलेसीमिया की जांच कराई। इसके बाद दीपक ने रक्तदान किया। साथ में एमटीएफसी संस्था के नरेश ढल, पालिका बाजार के प्रधान गुलशन निझावन व दूसरे समाजसेेवी भी मौजूद रहे। डॉक्टरों ने युगल को बताया कि थैलेसीमिया एक अनुवांशिक बीमारी है, जो माता-पिता या दोनों के जींस में गड़बड़ी के कारण होती है। बच्चे के जन्म के 3 महीने बाद कभी भी इस बीमारी के लक्षण नजर आ सकते हैं। कई रोगियों को 10 से 15 दिन में एक बार रक्त चढ़ाना पड़ता है। रक्त चढ़ाने से बीमारी से पीड़ित बच्चा 12 से 15 साल तक की आयु ही पूरी कर पाता है। सही उपचार लेने पर 25 वर्ष से ज्यादा समय तक पीड़ित जीवित रह सकता है।