रोहतक। जिला अदालत में पत्नी द्वारा मरने से पहले लिखा गया आई लव यू अनिल, मोहे बच्चा समझकर माफ कर देना, पति की रिहाई का आधार बन गया। अदालत में बचाव पक्ष यह साबित करने में कामयाब रहा कि विवाहिता ने दहेज उत्पीड़न से तंग आकर नहीं, बल्कि पेट की बीमारी से परेशान होकर जान दी थी। अदालत ने साक्ष्यों के अभाव में आरोपी पति को दहेज हत्या व दहेज मांगने के आरोपों से बरी कर दिया।
बचाव पक्ष के वकील संदीप सहलठ ने बताया कि अगस्त 2019 को पीजीआई थाना में बिहार के बेगुसराय निवासी एक व्यक्ति ने शिकायत दी थी कि उसकी दो बेटी व एक बेटा है। एक बेटी पूजा की शादी दिसंबर 2018 में बिहार स्थित लखीसराय निवासी अनिल के साथ की थी। अनिल कुछ समय बाद उसकी बेटी पूजा को लेकर रोहतक स्थित गांधी कैंप में किराये पर रहने लगा। आरोप था कि अनिल पूजा को दहेज के लिए तंग करता था। उस पर लगातार घर से दो लाख रुपये लाने के लिए दबाव बना रहा था। तंग आकर पूजा ने शादी के आठ माह बाद फांसी लगाकर जान दे दी या अनिल ने उसकी हत्या कर शव फंदे पर लटका दिया। पुलिस ने आरोपी को दहेज हत्या व दहेज उत्पीड़न के आरोप में गिरफ्तार कर लिया था। तभी से आरोपी के खिलाफ जिला अदालत में केस चल रहा था।
पुलिस ने नहीं कराई एफएसएल जांच
बचाव पक्ष के वकील ने बताया कि पुलिस को मौके से एक पत्र मिला था, जिसमें लिखा हुआ था कि आई लव यू अनिल, आगे बिहारी भाषा में लिखा था कि मुझे बच्चा समझकर माफ कर देना। पीड़ित पक्ष की तरफ से कहा गया कि यह पत्र पूजा ने लिखा। इतना ही नहीं, पुलिस ने भी एफएसएल जांच करवाकर यह साबित नहीं किया कि पत्र पूजा ने लिखा है। इस पर बहस के दौरान बचाव पक्ष ने कहा कि पत्र पुलिस ने पूजा के पास से बरामद किया है। साथ ही यह भी लिखा है कि जिस कमरे में पूजा का शव लटका हुआ था, वह कमरा अंदर से बंद था। इससे साबित होता है कि पत्र पूजा ने ही लिखा है। इसके अलावा पीड़ित पक्ष ऐसे सबूत अदालत में पेश नहीं कर सका, जिससे साबित हो की आरोपी दहेज मांगता था।