विकास सैनीरोहतक।
मौसम बदल रहा है। ऐसे में तीखी धूप के कारण बढ़ रही गर्मी और भूख-प्यास मधुमक्खियां को व्याकुल करने लगी है। बढ़ती गर्मी से इस बार फसल भी कुछ जल्दी पक आई है। इस कारण पौधों से फूल गायब हो चले हैं। इनकी जगह फल या फलियां खिल आई हैं। नतीजतन प्रकृति का सबसे अहम हिस्सा कही जाने वाली मधुमक्खियों को पर्याप्त भोजन-पानी नहीं मिल पा रहा है। यही वजह है कि इन दिनों मधुमक्खियों का हमला हो रहा है। ऐसी परिस्थिति में इन्हें छेड़ने या परेशान नहीं करना चाहिए। यह कहना है कीट विशेषज्ञ डाॅ. रामकरण और बागवानी विभाग के जिला अधिकारी कमल सैनी का। मधुमक्खियों के हमलों को लेकर अमर उजाला बातचीत में उन्होंने कई रोचक जानकारियां साझा कीं।
मधुमक्खियां इन दिनों गुस्साई हुई हैं। इसकी वजह मौसम का बदलाव, फसल पक कर कटाई होना, भोजन की कमी है। ऐसे में उन्हें कोई छेड़ने या उनका घर तोड़ने का प्रयास होने पर वे खतरा महसूस कर धावा बोल देती हैं। वे अपने हर डंक के साथ जहर की थैली छोड़ती हैं। अनुमान है कि किसी व्यक्ति को दो सौ के आसपास डंक लगने पर उसकी जान जा सकती है। इसलिए इस मौसम में मधुमक्खियों से बचकर रहना जरूरी है। इनके हमले पूजन के दौरान या अंतिम संस्कार के दौरान उठे धुएं के कारण भी होते हैं। वीरवार को पीजीआई पहुंची महिला कॉलेज की 25 छात्राओं को उनके गुस्से का सामना करना पड़ा।
तीन तरह की होती है मधुमक्खियां
मधुमक्खी तीन तरह की होती है। इनमें एपिस सेरेना इंडिका, एपिस फ्लोरिमा और रॉक बी शामिल हैं। इनमें रॉक बी मधुमक्खी जंगली और ज्यादा खतरनाक होती है। मधुमक्खियां वैसे तो साल भर अंडे देती रहती हैं, लेकिन गर्मी के सीजन में मधुमक्खियां अन्य सीजन के मुकाबले अधिक अंडे देती हैं। ऐसे में किसी भी तरह का धुआं मधुमक्खियों को हमले के लिए उकसाता है। छत्ते के आस-पास धुआं होने पर वे हमला कर देती हैं।
मधुमक्खियां यूं बनाती है शहद
मधुमक्खी फूलों का रस चूसकर दूसरे वाले पेट में जमा करती है। आधे घंटे तक मुंह की ग्रंथियों से निकलने वाले एंजाइम मिलाती हैं। फिर इसे छत्ते के छकोनिया खानों में रखती हैं। पंखों से हवा कर पानी की मात्रा 18 प्रतिशत से कम करने के बाद शहद तैयार हो जाता है।
लाल-पीले रंग या तेज गंध से होती हैं प्रभावित
मधुमक्खियों को फूल आकर्षित करते हैं। लिहाजा लाल-पीले रंग के कपड़े पहने होने पर ये इन्हें फूल समझकर आपके पास आ सकती हैं। इत्र या परफ्यूम लगा होने पर भी ये हमला कर सकती हैं।
मधुमक्खियों के बारे में ये खास बातें भी जानें...
- मोम से बने एक छत्ते में एक रानी, एक नर व शेष सैनिक और श्रमिक रहते हैं। यह संख्या 60 हजार तक हो सकती है।
- इसके डंक से जुड़ी रॉयल जेली की मदद से एड्सरोधी, शक्तिवर्धक दवाइयां तैयार होती हैं। यह गठिया के इलाज में भी कारगर है।
- मधुमक्खियाें के बनाए गए शहद में 82 प्रतिशत कार्बोहाइड्रेट होता है।
- एक छत्ते से साल में सात से आठ किलो शहद दो बार निकाला जा सकता है।
यूं करें मधुमक्खियाें से बचाव
- सुरक्षित स्थान पर जाकर खुद को मोटी चादर या कपड़े से पूरी तरह ढक लें।
- यथासंभव डंक बाहर निकालें। डंक अंदर टूटने न दें। डंक ज्यादा गहरा है तो डॉक्टर को दिखाएं।
- डंक वाली जगह गीला कपड़ा रखें या बर्फ का सेक करें। पानी और बोरिक सोडे का मिश्रण लगा सकते हैं।
वर्जन:
मधुमक्खियों का स्वभाव इन दिनों तल्ख होता है। गढ़ती गर्मी व भूख प्यास से व्याकुल होने के चलते वे परेशान रहती हैं। ऐसे में उन्हें छेड़ना या उनके घर धुंआ पहुंचना उन्हें बर्दाश्त नहीं होता है। नतीजत वे हमला कर देती हैं। इसलिए उन्हें परेशान करने के बजाय उनके भोजन पानी की व्यवस्था पर ध्यान देना बेहतर है। यह प्रकृति का मजबूत हिस्सा हैं। इसलिए इन्हें संरक्षित रखना जरूरी है।
कमल सैनी, जिला बागवानी अधिकारी।
मधुमक्खियां अधिकांश जंगली फलों व फसलों से अपना भोजन जुटाती हैं। गर्मी के दिनों में अन्य सीजन के मुकाबले भोजन की कमी आ जाती है। इस बार फसल भी कुछ जल्द पक आई है। इन दिनों मधुमक्खियां अंडे देकर परिवार का भी विस्तार करती हैं। ऐसे में मधुमक्खियों की टीम या यूनिट नई जगह घर बनाने और गंध की तलाश में रहती हैं। ऐसे में कोई न कोई इनके भोजन में बाधक बनता है या फिर इनकी दिनचर्या प्रभावित करता है। इससे वे गुस्सा या बेकाबू हो जाती हैं।
डाॅ. रामकरण, कीट विशेषज्ञ, कृषि विज्ञान केंद्र रोहतक।