रोहतक। नगर निगम शहर में बॉयो सीएनजी प्लांट की संभावनाएं तलाश रहा है। इसके लिए नगर निगम आयुक्त ने मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर नगर निगम के तकनीकी एक्सपर्ट से बैठक करके जानकारी जुटाई है। इंदौर में बॉयो सीएनजी से सिटी बस सेवा तक चल रही हैं। प्लांट के लिए नगर निगम फंड पब्लिक-प्राइवेट पाटनर्शिप (पीपीपी) योजना के तहत जुटाएगा।
करीब एक दशक पहले साल 2011 में शहर की जनगणना हुई, जिसमें जनसंख्या पौने 4 लाख रुपये आंकी गई थी। जबकि 2017 में नगर निगम ने अपने स्तर पर जनगणना करवाई तो 5 लाख 12 हजार दर्ज की गई। जबकि क्षेत्रफल 139 वर्ग किलोमीटर है। 22 वार्ड में फैले शहर में से हर रोज 150 टन से ज्यादा कचरा निकल रहा है। इसे भिवानी रोड स्थित सॉलिड वेस्ट ट्रीटमेंट प्लांट में ले जाया जाता है, जहां उसका निस्तारण करके खाद बनाई जा रही है। इस खाद को फिलहाल किसानों को मुफ्त दिया जाता है। निगम खाद का पार्कों में भी प्रयोग कर रहा है। अब निगम ने कचरे से बॉयो सीएनजी प्लांट लगाने का प्लान तैयार किया है।
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वायु प्रदूषण कंट्रोल होगा, सीएनजी भी मिलेगी
स्वच्छता सर्वेक्षण में हर साल पूरे देश में अव्वल रहने वाले मध्यप्रदेश के शहर इंदौर के नगर निगम एरिया में 2 बायो सीएनजी प्लांट लगे हुए हैं, जहां से बनाई जा रही बॉयो सीएनजी से सिटी बस सेवा चलाई जा रही है। निगम आयुक्त ने बताया कि वहां एक प्लांट से मात्र 20 मीट्रिक टन गीले कचरे से हर रोज 800 किलोग्राम सीएनजी पैदा हो रही है, जबकि दूसरे बॉयो प्लांट में गीले कचरे से हर रोज 600 किलोग्राम सीएनजी पैदा की जा रही है। जबकि रोहतक में हर रोज 150 मीट्रिक टन कचरा निकल रहा है। इंदौर नगर निगम के इस मॉडल को रोहतक अपनाने की पहल कर रहा है। इससे शहर में वायु प्रदूषण नियंत्रित होगा वहीं कूड़े का निस्तारण भी अच्छी तरह से हो सकेगा।
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पीपीपी मोड से आएगा फंड, जल्द रखा जाएगा प्रस्ताव
बॉयो सीएनजी प्लांट लगाने के लिए करोड़ों रुपये की लागत आएगी। इसके लिए निजी कंपनियों व कारोबारियों से संपर्क किया जा रहा है। उम्मीद कोई न कोई कारोबारी आगे आएगा। इंदौर, भोपाल व दूसरे बड़े शहरों में बॉयो सीएनजी प्लांट कामयाबी से चल रहे हैं। इससे एक तो कचरा ठिकाने लगेगा, दूसरा शहरवासियों को सीएनजी की सुविधा रोहतक में ही मिल जाएगी।
-प्रदीप गोदारा, आयुक्त नगर निगम