रोहतक। बदलते दौर और घर में जगह की कमी के कारण अब बैंक्वेट हॉल और कम्युनिटी सेंटर ही मां का आंगन बन रहे हैं। तीन दशक पहले की बात करें तो पहले घर के बाहर तंबू लगाकर विवाह की सभी व्यवस्थाएं और मंडप सजाया जाता था। खाने-पीने का इंतजाम भी घर परिवार और पड़ोस के सदस्य किया करते थे। बड़े-बुर्जुगों का कहना है कि इससे रिश्तों में मिठास बनी रहती है। मां के आंगन में पली-बढ़ी बेटी कि विदाई भी वहीं से होती थी।
आज के दौर में बैंक्वेट हॉल और कम्युनिटी सेंटर से ही अब बेटी कि विदाई की जा रही है। शहर में आज निजी बैंक्वेट हॉल के किराये की अगर बात करें तो यह मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए बड़ी चुनौती है। यहां एक लाख से पांच लाख रुपये तक किराया है। सरकार की ओर से शहर कम्युनिटी सेंटर खोले गए हैं, लेकिन यह भी शादी के सीजन में कम पड़ रहे हैं। इनका किराए 11,000 से 21,000 तक है, लेकिन शहर में केवल आठ कम्युनिटी सेंटर ही हैं, उनकी बुकिंग तीन से चार महीने पहले ही हो जाती है।
घर में विवाह की बात पक्की होते ही समारोह के लिए हॉल कि बुकिंग की चिंता होती है। कम्युनिटी सेंटर के किराये मध्य वर्गीय परिवार के हिसाब से ठीक है। इसलिए कोशिश रहती है समारोह के लिए बुकिंग वहीं पर हो सके।
-हरीश तनेजा, स्थानीय निवासी
शहर में निजी बैंक्वेट हॉल बहुत हैं, लेकिन उनमें किराया अधिक है। कुछ समय पहले मेरी बेटी कि शादी हुई, सरकारी कम्युनिटी सेंटर में शादी समारोह आयोजित किया गया था, लेकिन अधिक मांग होने के कारण बुकिंग चार महीने पहले करवानी पड़ी थी।
-प्रेम सागर, निवासी