रोहतक। जिले के किसान फसल अवशेष न जलाएं। फसल जलाने की घटनाएं रोकने के लिए जिले में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 लागू की गई है। आदेशों की अवहेलना करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। यह कहना है उपायुक्त अजय कुमार का। वह सोमवार को पराली जलाने से हाेने वाले नुकसान की जानकारी दे रहे थे।
उपायुक्त ने किसानों से पराली या फसल अवशेष जलाने के बजाए उनका प्रबंधन करने की अपील करते हुए कहा कि फसल अवशेष जलाना न केवल खेत के लिए नुकसानदायक है बल्कि प्राणियों के लिए भी खतरनाक है। उन्होंने कहा कि जिले में यदि कहीं भी फसल अवशेषों के जलाने की कोई घटना सामने आती है तो यह सही नहीं है। किसान धान की फसल की कटाई के बाद फसल अवशेषों को आग न लगाएं। फसल अवशेषों को जलाने से पर्यावरण प्रदूषित होता है। पशुओं के लिए चारे की कमी होती है। ऐसा करने से मिट्टी में मौजूद मित्र कीट नष्ट होते हैं। भूमि की उपजाऊ शक्ति भी कमजोर होती है। किसान फसल अवशेषों का उचित प्रबंधन करें। फसल अवशेषों से पशुओं के लिए चारा भी बनाया जा सकता है। किसान कृषि यंत्रों की मदद से फसल अवशेषों की गांठ बनाकर अतिरिक्त आय भी कमा सकते हैं। फसल अवशेषों को मिट्टी में मिलाकर भूमि की उपजाऊ शक्ति को भी बढ़ाया जा सकता है।
उपयुक्त ने कहा कि प्रशासन ने इस कार्य की निगरानी के लिए ग्राम, खंड एवं जिला स्तर पर विभिन्न विभागों की टीम गठित की गई है। फसल अवशेषों में आग लगाते मिले किसान के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जाएगी। दोषी किसान के फार्म रिकॉर्ड में रेड एंट्री कर दी जाएगी। इसके फलस्वरूप किसान अगले दो सीजन तक अपनी फसल के उत्पादों को मंडी में नहीं बेच पाएगा। कृषि विभाग की विभिन्न योजनाओं का लाभ नहीं मिल पाएगा। फसल अवशेष जलाने की घटनाओं को पूर्ण रूप से रोकने के लिए भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता लागू की गई है।