मकर संक्राति पर बुजुर्गो को शाल दे कर हुई गल्ती माफी मांगती महिला। अमर उजाला
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रोहतक। रोहतक की बहुओं ने ठेठ ग्रामीण अंदाज में दामण-कुर्ती पहनकर बुजुर्गों का मान-सम्मान किया। हरियाणवी संस्कृति की खुशबू को फैलाने के लिए वीरवार को जींद बाईपास स्थित निजी फार्म में मकर संक्रांति का पर्व मनाया गया। यहां हरियाणवी वेशभूषा दामण-कुर्ती और सिर पर चुंदड़ ओढ़े रोहतक की बहुओं ने अपने बड़े बुजुर्गों के पैर छूकर आशीर्वाद लिया और मान-सम्मान किया। इस दौरान बहुओं ने बुजुर्गों को शॉल और कंबल ओढ़ाए। इसी के साथ ढोल ताशों की धुन पर महिलाओं ने लोकगीतों पर ठुमके लगाये।
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संस्कृतियों की खिचड़ी में फल-फूल रहे रिश्ते
भारतीय परिवारों में खिचड़ी महज व्यंजन नहीं बल्कि एक परंपरा है, जो अपने आप में पूरी संस्कृति को समेटे हुए है। हरियाणा में भी संस्कृतियों की इसी खिचड़ी में रिश्ते फल-फूल रहे हैं। यहां अलग-अलग वेशभूषा, अलग-अलग धर्म के लोगों ने मकर संक्रांति मनाई। सभी के त्योहार को मनाने का तरीका अलग रहा। इस पर्व का मूल है नए अनाज को ग्रहण करना, पशुओं के प्रति कृतज्ञता प्रकट करना और सूर्य देव की उपासना करना। इस दिन किसी ने पतंगबाजी की तो किसी ने बड़ों को मान देकर संक्रांति मनाई। तो वहीं राजपूतों ने तलवारों की पूजा कर इस पर्व को मनाया।