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टोकन सिस्टम पर दो गुट में बंटे ऑटो चालक, कई विरोध में उतरे

Sat, 26 Nov 2016 02:14 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक
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पुलिस प्रशासन ने खारिज की समिति की मांग, वापस नहीं लिया जाएगा रूट प्लान - फोटो : amar ujala
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टोकन सिस्टम पर ऑटो चालक दो गुटों में बंट गए हैं। शुक्रवार को एक तरफ मानसरोवर पार्क में न्यू रोहतक ऑटो रिक्शा कल्याण समिति के बैनर तले कई ऑटो चालक रूट प्लान का विरोध कर रहे थे, दूसरी ओर कई ऑटो चालक पुराना आईटीआई मैदान में टोकन ले रहे थे। रूट प्लान का शुरूआत से ही विरोध करने वाली समिति के आह्वान पर सुबह 10 बजे सैकड़ों की संख्या में ऑटो चालक मानसरोवर पार्क में एकत्रित हुए और रूट प्लान व टोकन सिस्टम का विरोध किया। वक्ताओं ने प्रशासन पर मनमानी करने का आरोप लगाया। यातायात निरीक्षक और डीएसपी के स्थानांतरण की मांग की। डीसी से रूट प्लान खत्म करने व टोकन वितरण कार्य को बंद करने की मांग की। जबकि डीएसपी का कहना है कि रूट प्लान किसी भी सूरत में वापस नहीं लिया जाएगा।  न्यू समिति के प्रधान राजेंद्र दहिया का कहना है कि ऑटो चालकों के पास पूरे नगर निगम क्षेत्र में ऑटो संचालित करने का परमिट है। इसलिए रूट प्लान गलत है। आरोप लगाया कि पुलिस प्रशासन ने रूट निर्धारित करने के लिए ऑटो चालकों के साथ बैठक नहीं की। प्रशासन ने अपनी मर्जी से रूट तय किये और चालान काटने की धमकी देकर जबरन टोकन बांट रहा है। उन्होंने प्लान को निरस्त करके टोकन वितरण को बंद करने की मांग की। दहिया का कहना है कि रूट प्लान के तहत ऑटो संचालन से चालकों को आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ेगा। समिति के महासचिव सुरेश शर्मा और कोषाध्यक्ष मेहर सिंह पांचाल ने डीसी को सौंपे ज्ञापन में मांग की है कि रूट प्लान को वापस लिया जाए और टोकन वितरण बंद किया जाए। उन्होंने आरोप लगाया है कि चालकों के कागजात पूरे होने के बावजूद यातायात निरीक्षक की ओर से चालान काटा जाता है और दुर्व्यवहार किया जाता है। मांग की कि यातायात निरीक्षक का स्थानांतरण किया जाए। समिति के बैनर तले ऑटो चालक डीसी को ज्ञापन सौंपने पहुंचे थे। डीसी की गैर मौजूदगी में उन्होंने सीटीएम को ज्ञापन सौंपा।
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शाम की बैठक में नहीं हुआ समझौता, मंत्री को सौंपेंगे ज्ञापन

सीटीएम को ज्ञापन देते समय सहमति बनी थी कि शहर में मौजूद दोनों ऑटो यूनियन के पांच सदस्य और यातायात निरीक्षक शाम साढ़े चार बजे बैठक करके मामले को सुलझाएंगे। इस दौरान डीएसपी भी मौजूद रहेंगे। लेकिन शाम की बैठक में कोई नतीजा नहीं निकल सका। जहां ऑटो कल्याण समिति रूट प्लान के खिलाफ थी, वहीं हरियाणा ऑटो कल्याण संघ के सदस्य प्रशासन के साथ थे। न्यू समिति के महासचिव सुरेश शर्मा ने बताया कि बैठक में उनकी बातों को नहीं सुना गया। उनकी मांगों और परेशानियों की ओर ध्यान नहीं दिया गया इसलिए वह शनिवार को सहकारिता मंत्री मनीष ग्रोवर से मिलकर समस्या बताएंगे। बताते हैं कि इस दौरान मौजूद ऑटो चालकों ने यातायात निरीक्षक पर मानसिक शोषण और अत्याचार करने का आरोप भी लगाया।

यातायात पुलिस करती है दुर्व्यवहार

ऑटो चालक  दीपक ने बताया कि उनकी गाड़ी दो बार जब्त की गई। आरोप लगाया कि यातायात निरीक्षक ने फर्जी धाराएं लगाकर चालान काटा। इसकी शिकायत डीएसपी से की, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद मामले की शिकायत सीएम विंडो पर की, लेकिन अभी तक संतोष जनक  जवाब नहीं मिला। मामला जुलाई महीने का है। इतने दिन बीत जानेे के बाद भी न्याय नहीं मिला है।
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काट देते हैं नो पार्किंग का चालान

ऑटो चालक अनिल और संदीप ने आरोप लगाया कि यातायात पुलिस उनके साथ दुर्व्यवहार करती है। वह जब यात्रियों को उनके गंतव्य स्थान पर उतारते हैं तो पुलिस वाले नो पार्किंग का चालान काट देते हैं। विरोध करने पर अलग से धाराएं जोड़ देते हैं और ऑटो जब्त करने की धमकी देते हैं।


रूट प्लान वापस नहीं होगा। किसी चालक पर कोई दबाव नहीं है। कोई भी किसी भी रूट का टोकन ले सकता है। जो टोकन नहीं लेंगे, उन पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। दुर्व्यवहार का मामला संज्ञान में नहीं आया है। अगर ऐसा है तो जांच करके उचित कार्रवाई की जाएगी।
- डॉ. रविंद्र, डीएसपी

गुलाबी ऑटो चालक रूट सिस्टम से बाहर

पुलिस प्रशासन ने गुलाबी ऑटो की महिला चालकों को रूट प्लान से अलग रखा है। हरियाणा प्रदेश ऑटो कल्याण संघ के प्रदेशाध्यक्ष तस्वीर सिंह टाक ने बताया कि गुलाबी ऑटो की महिला चालक शहर में किसी भी रूट पर आवागमन कर सकेंगी। उनके लिए रूट नहीं निर्धारित किया जाएगा। उन्हें टोकन लेने की जरूरत नहीं है। संख्या में कम होने के कारण यह फैसला लिया गया है।

नये ऑटो चालकों को एक माह की छूट

ऑटो यूनियन के प्रदेशाध्यक्ष तस्वीर सिंह टाक ने बताया कि डीएसपी ने कहा कि जिन ऑटो चालकों ने हाल ही में नया ऑटो लिया और उनके परमिट समेत अन्य जरूरी कागजात नहीं बने हैं, उन्हें एक महीने की छूट दी जाएगी। इस बीच वह अपने कागजात तैयार करवा लें। इसके बाद कागजात नहीं होने पर उनका चालान काटा जाएगा। ऐसे चालकों को सफेद रंग का टोकन दिया जाएगा। इस पर अंग्रेजी का ए अक्षर लिखा रहेगा। इन्हें एक माह तक बिना कागजों के निर्धारित रूट पर गाड़ियां चलाने का अधिकार होगा। ऐसे चालक गाड़ी का बिल, अस्थायी गाड़ी नंबर, पहचान पत्र (आधार कार्ड, राशन कार्ड, मतदाता पहचान पत्र और निवास प्रमाण पत्र) दिखाकर मनचाहा रूट का टोकन नंबर ले सकते हैं।

तीन रूटों के टोकन हो गए खत्म

पुलिस प्रशासन की ओर से शुक्रवार को भी निर्धारित छह रूटों में से लगभग सभी के टोकन दिए गए, लेकिन तीन रूटों के टोकन जल्दी खत्म होने से ऑटो चालक इंतजार करते रहे। बाद में उन्हें बिना टोकन लौटना पड़ा। अब शनिवार को टोकन देने की बात कही जा रही है। दरअसल, जिन रूटों पर ज्यादा यात्री मिलने की संभावना उस रूट के टोकन की अधिक डिमांड है। इस वजह से तीन रूटों के टोकन जल्द खत्म हो गए। वहीं, चौथे दिन शुक्रवार को कुल 200 टोकन बांटे गए।
बता दें कि प्रशासन की ओर से शहर में जाम की समस्या को खत्म करने के लिए ऑटो चालकों के लिए रूट प्लान तैयार किया गया है। इसके तहत अब तक छह रूट तय किए गये हैं। इन रूटों के लिए मंगलवार से पुराना आईटीआई मैदान में ऑटो चालकों को टोकन दिया जा रहा है। टोकन लेने के लिए सैकड़ों की संख्या में ऑटो चालक रोज पहुंच रहे हैं। पिछले चार दिनों में करीब 1650 ऑटो चालकों को टोकन बांटे गए हैं। जबकि शहर में 7500 ऑटो पंजीकृत हैं।


इंतहा हो गई इंतजार की..

सुबह से लाइन मेें लगे थे। माता दरवाजा से दिल्ली बाईपास तक का टोकन चाहिए, लेकिन टोकन खत्म हो गया। अब इंतजार कर रहे हैं।
- सुधीर, ऑटो चालक
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सुबह से पुलिस वाले कह रहे हैं कि टोकन छपकर आ रहा है, लेकिन दो बजे तक तो नहीं आ पाया। माता दरवाजा से दिल्ली बाईपास तक का टोकन नहीं मिल रहा है। बिना खाए पीए टोकन के इंतजार में बैठे हैं।
- राजेश, ऑटो चालक

छह नए रूटों पर स्थिति स्पष्ट नहीं
हरियाणा प्रदेश ऑटो कल्याण संघ ने पुलिस प्रशासन को छह नए रूट प्रस्तावित किए हैं। इस पर शुक्रवार को प्रशासन की ओर से स्थिति स्पष्ट की जानी थी। ऑटो कल्याण संघ के प्रदेश अध्यक्ष तस्वीर सिंह टाक का कहना है कि यदि शनिवार को टोकन छपकर आ गए तो इन रूटों पर टोकन वितरित किया जाएगा।

नोटबंदी का असर : पुराने नोट नहीं चलने से आ रही परेशानी

नोटबंदी का असर ऑटो वालों के टोकन वितरण पर भी पड़ रहा है। नौ नवंबर से लागू नोटबंदी की वजह से प्रिंटिंग प्रेस वालों ने स्टीकर छापने से मना कर दिया था। इस कारण 12 नवंबर से टोकन नहीं दिया जा सका। पैसों का इंतजाम करके 22 नवंबर को स्टीकर छपवाए गए। फिर उनका वितरण शुरू किया गया। शुक्रवार को फिर प्रिंटिंग प्रेस वालों ने पैसों के अभाव में स्टीकर छापने से मना कर दिया। इस वजह से टोकन वितरण का कार्य प्रभावित हो गया। अब शनिवार को साढ़े बारह बजे से नए स्टीकरों के आने पर टोकन का वितरण हो पाएगा।
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