जिले के गांव दिनोद की बेटी अरुणा का टोक्यो पैरा ओलंपिक में चयन हुआ है। वह ताइक्वांडो में क्वालिफाई करने वाली पहली भारतीय महिला खिलाड़ी है। अरुणा के चयन से तो पूरा देश खुश है, मगर इसके पीछे उसके स्वयं और परिवार का संघर्ष भी छिपा है। बेटी की सफलता के लिए प्राइवेट कंपनी में चालक दिनोद वासी नरेश ने न केवल कर्ज लिया, बल्कि परिवार के गहने तक बेचे। अनेक दफा परिस्थितियों के साथ समझौता किया मगर हार नहीं मानी। परिवार की उम्मीदों पर खरा उतरते हुए बेटी ने पैरा ओलंपिक तक का सफर तय किया है। अब सबकी आस है कि बेटी गोल्ड के साथ देश का नाम रोशन करें।
नरेश कुमार की 21 वर्षीय बेटी अरुणा तंवर न केवल पढ़ाई में अव्वल है बल्कि खेलों में भी ऐसा रिकार्ड बनाया कि आज पूरा देश गर्व कर रहा है। ताइक्वांडो खिलाड़ी अरुणा ने अपने खेल की बदौलत पैरा ओलंपिक का टिकट पक्का कर लिया है। 2016 में अपने खेल कॅरिअर की शुरुआत करने वाली अरुणा पांच साल की अथक मेहनत से यह सफर तय किया। वह 49 किलो भार वर्ग में खेलती है। अरुणा ने स्वराज सिंह, सुखदेवराज और अशोक तीनों कोचों से प्रशिक्षण लिया।
बेटी की सफलता पर पिता की आंखों से खुशी के साथ संघर्ष का दर्द भी छलका। पिता नरेश तंवर ने बताया कि पढ़ाई हो या खेल, बेटी ने उन्हें कभी निराश नहीं किया। बेटी की तैयारियों में परिवार को संघर्ष करना पड़ा है। उसका वेतन कम है, मगर इससे ही बेटी की तैयारियां करवाईं। जरूरत पड़ी तो कर्ज भी लिया और परिवार के आभूषण भी बेचने पड़े। बेटी को चार-पांच बार बाहर खेलने जाना पड़ा। तब एक-डेढ़ लाख रुपये खर्च हुए। उस समय आर्थिक समस्या आडे़ आई। तब कर्ज भी लिया और अन्य व्यवस्थाएं भी करनी पड़ी।
अब पैरा ओलंपिक में गोल्डन सफर की आस
अरुणा के ताइक्वांडो में चयन से हर ओर खुशी का माहौल है और परिवार को बधाइयां मिल रही हैं। बेटी के संघर्ष में साथ रहे पिता और कोच को अरुणा की मेहनत और तैयारियों पर विश्वास है और उन्होंने दावा किया है कि बेटी पैरा ओलंपिक में सिर्फ खेलेगी नहीं, बल्कि गोल्ड भी जीतेगी।
मुझे मेरी बेटी अरुणा पर गर्व है। बचपन से ही पढ़ाई में होशियार थी और खेल में भी उसने बेहतरीन भूमिका निभाई। अब पैरा ओलंपिक में वह स्वर्ण पदक लाकर अपने देश का नाम रोशन करेगी। वह हर प्रतियोगिता में विजय रही है और अब पैरा ओलंपिक में भी जीत हासिल करेगी।
- नरेश, अरुणा तंवर का पिता।
अरुणा शुरू से ही अन्य खिलाड़ियों से विशेष पहचान बना कर खेल रही है। यह देश के लिए गर्व की बात है कि 47 साल बाद पैरा ताइक्वांडो में भारत का प्रतिनिधित्व कर रहा है। हम सभी को अरुणा पर पूर्ण विश्वास है कि वह पैरा ओलंपिक में स्वर्ण पदक हासिल करेगी, अपने देश और परिवार का नाम रोशन करेगी।
- स्वराज सिंह, कोच, अरुणा तंवर