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आढ़ती सुसाइड केस : फोन देखकर जेब में डाला और कनपटी पर रिवाॅल्वर सटा दबा दिया ट्रिगर

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26-नई अनाज मंडी ​स्थित महिलाप-जयपाल फर्म, जिसके सामने आढ़ती ने अपनी कनपटी पर गोली मारकर जान दे
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माई सिटी रिपोर्टर
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रोहतक। नई अनाज मंडी के टॉप फाइव आढ़तियों में शुमार आईपीएस राहुल के पिता जयपाल बल्हारा (60) ने शुक्रवार दोपहर करीब 4:30 बजे आढ़त के सामने कुर्सी पर बैठे-बैठे फोन देख रहे थे। फिर, इसे जेब में रख लिया। अचानक लाइसेंसी रिवाल्वर कनपटी से सटाई और ट्रिगर दबा दिया।
आत्मघाती कदम उठाने के करीब दो घंटे पहले जयपाल आढ़त एसोसिएशन की बैठक में हिस्सा लेकर लौटे थे। वहां किसी ने कोई तनाव नहीं देखा। लौटकर अपनी आढ़त पर पानी पीया और पास में ताश खेलने चले गए। सवा चार बजे लौटे और आढ़त के बाहर बरामदे में कुर्सी डालकर कुछ देर फोन चलाते रहे।
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पुलिस सूत्रों के मुताबिक, दुकान में लगे सीसीटीवी फुटेज और आढ़तियों से पूछताछ में भी प्रारंभिक तौरपर यही जानकारी पता लगी है। उन्होंने फोन में कुछ ऐसा देखा या फिर कोई और कारण था, जिसकी वजह से उन्होंने जिंदगी से ही छुटकारा पाने की सोच ली, अभी कुछ नहीं पता।
पुलिस को मौके से कोई सुसाइड नोट भी नहीं मिला। किसी से झगड़ा आदि की बात भी सामने नहीं आई है। घर-परिवार और जिम्मेदारियों से पूरी तरह मुक्त होने के बावजूद ऐसे कदम से हर कोई हतप्रभ है। 1997 में नई अनाज मंडी बनने पर उन्होंने एक निजी कंपनी की नौकरी छोड़कर फौज से लौटे भाई महिपाल के साथ आढ़त शुरू की थी। इसके बाद कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। खूब कारोबार फला-फूला।
तीन संतानों में आईपीएस राहुल उनके इकलौते व सबसे छोटे बेटे हैं। दोनों बेटियों की शादी हो चुकी है। कोई जिम्मेदारी ऐसी नहीं थी कि तनाव की जरूरत होती। पुलिस परिवार से जुड़ा प्रकरण हो जाने के कारण स्थानीय अफसर भी फूंक-फूंककर कदम उठा रहे हैं।
शनिवार को आईपीएस राहुल के लौटने और अन्य परिजनों के बयान दर्ज करने के बाद ही पुलिस आगे की कार्रवाई करेगी। फिलहाल, परिवार के लोगों ने पूरी तरह चुप्पी साध रखी है। पुलिस के मुताबिक, जयपाल के फोन की जांच कराई जाएगी ताकि आत्महत्या के कारणों का पता लग सके।
दो घंटे पहले बैठक में आए थे, नहीं पता था ऐसा कदम उठा लेंगे : विज
आढ़ती एसोसिएशन के प्रधान स्वतंत्र विज ने बताया कि जयपाल बल्हारा बेहद मिलनसार व खुश मिजाज व्यक्ति थे। दोपहर एक से ढाई बजे तक शुक्रवार को ही आढ़ती एसोसिएशन के भवन में गेहूं के सीजन को लेकर आढ़तियों की बैठक में वह आए थे। उनके चेहरे पर कोई तनाव नहींं दिखा था। करीब ढाई बजे बैठक खत्म होने के बाद वह अपनी आढ़त पर चले गए। यहां से जाते वक्त जरा भी अहसास नहीं था कि वे कुछ घंटे बाद ही इतना बड़ा आत्मघाती कदम उठा लेंगे।
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11 साल से हूं मुंशी, बच्चों की तरह रखते थे : नीरज
आढ़त के मुंशी नीरज घटना के बाद डबडबाई आंखों से बताया कि बाबूजी (जयपाल) उन्हें अपने बच्चों की तरह रखते थे। वह 11 साल से उनके पास काम कर रहे हैं। सारा लेनदेन बाबूजी ही संभालते थे। दूसरे भाई महिपाल फौजी माल भेजने का बंदोबस्त देखते थे। शुक्रवार सुबह वह रोज की तरह दुकान पर आए थे। घटना के पहले तक एकदम सामान्य ही दिखे। कभी ऐसा नहीं लगा कि वे इतना बड़ा कदम उठा लेंगे।
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मौत से गम में डूबा परिवार
जयपाल की मौत से पूरा बल्हारा परिवार गम में डूब गया। भाई महिपाल फौजी, भतीजा आशीष व परिवार के अन्य लोग सुबकते रहे। घटना को लेकर किसी ने कोई बात भी नहीं की। मीडिया से भी दूरी बनाए रखी। दुख की घड़ी में आसपास के आढ़तियों और ग्रामीणों ने ढांढस बंधाया।
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पुलिस को ढूंढने होंगे इन सवालों के जवाब
- बढ़िया कारोबार होकर भी कहीं मोटा पैसा तो नहीं फंस गया था?
- कोई ऐसी कॉल तो नहीं आई जिसमें वह इतनी परेशानी में घिरा मान बैठे कि ऐसा फैसला ले डाला?
- आढ़ती एसोसिएशन की बैठक व ताश खेलते समय तनाव में नहीं थे तो अचानक ऐसा क्या हो गया?
- कोई पारिवारिक विवाद तो नहीं जिसकी पीड़ा में घुटते-घुटते हार गए?

26-नई अनाज मंडी स्थित महिलाप-जयपाल फर्म, जिसके सामने आढ़ती ने अपनी कनपटी पर गोली मारकर जान दे

26-नई अनाज मंडी स्थित महिलाप-जयपाल फर्म, जिसके सामने आढ़ती ने अपनी कनपटी पर गोली मारकर जान दे

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