एमडीयू में एंटी कैंसर दवाई का डिलीवरी सिस्टम तैयार होगा। इसे औषधि
विज्ञान विभाग के डॉ. दुरेजा तीन साल में तैयार करेंगे। यूजीसी ने उनके
प्रोजेक्ट को मंजूरी देते हुए विभाग को 15 लाख रुपये की ग्रांट भी आवंटित
की।
औषध विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. हरीश दुरेजा ने ‘स्टेटिसटिकल
डिजाइन नैनोलीपोसोमल डिलीवरी फॉर एंटी कैंसर डूगस’ विषय पर यूजीसी को
पिछले साल प्रोजेक्ट सबमिट किया था। वहीं अब यूजीसी ने तीन साल में पूरे
होने वाले प्रोजेक्ट को मंजूरी देते हुए विभाग को 15 लाख की ग्रांट आवंटित
कर दी है।
डॉ. दुरेजा ने बताया कि इस प्रोजेक्ट के तहत एंटी कैंसर दवाई का
डिलीवरी सिस्टम तैयार किया जाएगा। अभी तक कैंसर से पीड़ित मरीजों को एंटी
कैंसर दवाई इंजेक्शन के माध्यम से दी जाती है। बाजार में मिलने वाले टेबलेट
का असर भी कम रहता है।
एंटी कैंसर दवाई से कई बार मरीज के शरीर के अन्य
हिस्सों पर भी प्रभाव पड़ता है। इस प्रोजेक्ट के माध्यम से तैयार होने वाले
सिस्टम का सीधा असर कैंसर प्वॉइंट को टच करेगा। डॉ. दुरेजा ने बताया कि
इसके लिए टेबलेट बनाई जाए या कैप्सूल, इस पर भी काम होगा।
गौरतलब है कि डॉ.
हरीश दुरेजा के 115 शोध पत्र राष्ट्रीय- अंतरराष्ट्रीय स्तर की शोध
पत्रिकाओं में प्रकाशित हुए हैं। यूनिवर्सिटी की ओर से बेस्ट पीएचडी थीसिस
अवॉर्ड से भी डॉ. दुरेजा सम्मानित किए जा चुके हैं।
दिसंबर में यूजीसी करेगा रिव्यू
प्रोजेक्ट
के पूरा होने के बाद एंटी कैसर दवाई के डिलीवरी सिस्टम की टेस्टिंग
मलेशिया और जम्मू के इंस्टीट्यूट में होगी। टेस्टिंग होने के बाद ही आगे की
प्रक्रिया पूरी की जाएगी। इससे पहले इसी वर्ष दिसंबर में यूजीसी भी इस
प्रोजेक्ट का रिव्यू करेगी। यूजीसी तय करेगी कि शोध के लिए ग्रांट पूरी है
या फिर और जरूरत होगी।