विजेंद्र कौशिक
रोहतक। उपभोक्ता के सिबिल स्कोर में दूसरे का बैंक लोन जोड़ने पर जिला उपभोक्ता आयोग ने स्कोर तैयार करने वाली मुंबई की ट्रांस यूनियन सिबिल लिमिटेड पर 10 हजार रुपये हर्जाना लगाया है। याचिकाकर्ता खेड़ी सांपला निवासी कर्मबीर को पांच हजार रुपये कानूनी खर्च देते हुए रिकाॅर्ड दुरुस्त करने की हिदायत दी है।
आयोग के रिकाॅर्ड के मुताबिक, याचिकाकर्ता ने मई 2022 में अर्जी दी कि उसके सिबिल स्कोर में बैंक लोन दिखाया गया है। उसने कोई लोन नहीं लिया। उसने सांपला स्थित बैंक में संपर्क किया। उसके नाम एक बैंक लोन बताया गया। इससे उसे काफी पीड़ा हुई।
अर्जी दी कि उसके सिबिल स्कोर से लोन हटाया जाए। इसके बावजूद कोई कदम नहीं उठाया गया। उसे मानसिक परेशानी के लिए तीन लाख व सेवाओं में कमी के लिए 1 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाए। सिबिल स्कोर का रिकाॅर्ड ठीक किया जाए।
आयोग ने निजी बैंक व सिबिल स्कोर तैयार करने वाली कंपनी को नोटिस दिया। बैंक की तरफ से कहा गया कि इससे उनका कोई संबंध नहीं है जबकि सिबिल स्कोर तैयार करने वाली एजेंसी ने कहा कि उपभोक्ता से उनका सीधा कोई संबंध नहीं है।
एजेंसी ने कहा, सीआर बनाते समय हुई तकनीकी गड़बड़ी
सिबिल स्कोर बनाने वाली एजेंसी ने जवाब में कह कि यह गलती क्रेडिट इंफॉर्मेशन रिपोर्ट (सीआर) बनाने के सिस्टम की वजह से हुई। सिस्टम मैच लॉजिक पर काम करता है। इसमें नाम, जन्मतिथि, पता, लिंग, पैन नंबर, पासपोर्ट नंबर या वोटर आईडी नंबर या अन्य कागजात देखे जाते हैं। कभी-कभी दो लोगों का डाटा आपस में मिल जाता है। लोन जानबूझकर नहीं जोड़ा गया। दूसरी तरफ आयोग ने कहा कि नाम व पता मिल सकते हैं लेकिन आईडी आपस में नहीं मिल सकती।
10 हजार रुपये हर्जाना, पांच हजार कानूनी खर्च के तौर पर दिए जाएं
आयोग ने कहा कि सिबिल स्कोर तैयार करने वाली एजेंसी की कमी से गलत लोन जोड़ा गया। एजेंसी याचिकाकर्ता को 10 हजार रुपये हर्जाने के तौर पर व पांच हजार कानूनी खर्च के तौर पर दे।
बैंक या दूसरी वित्तीय संस्थाएं आम उपभोक्ताओं को लोन देते समय सिबिल स्कोर की जांच करती हैं। इसमें उपभोक्ता के पुराने लेनदेन, लोन के रिकाॅर्ड से लेकर किस्त जमा कराने की स्थिति देखी जाती है। एजेंसी की तरफ से 300 से लेकर 900 तक का सिबिल स्कोर दिया जाता है। अगर बैंक उपभोक्ता का सिबिल स्कोर सही है तो बैंक दूसरे की अपेक्षा कम ब्याज दर पर जल्दी लोन दे देता है।