.किशनपुरा चौपाल में सप्तक कल्चरल सोसाइटी दवारा आयोजित नाटक अंधेर नगरी में प्रस्तृति देते कलाकार
रोहतक। सप्तक कल्चरल सोसाइटी के प्रसिद्ध हास्य नाटक अंधेर नगरी का स्थानीय किशनपुरा चौपाल में दसवां सफल मंचन हुआ। भारतेंदु हरिश्चंद्र की ओर से लगभग 150 साल पहले लिखे गए नाटक का निर्देशन और पुनर्लेखन विश्व, दीपक त्रिखा ने और सहनिर्देशक अविनाश सैनी ने किया। नौटंकी शैली में प्रस्तुत एक घंटे का यह नाटक दर्शकों की भरपूर तालियां बटोरने में कामयाब रहा।
महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय के पत्रकारिता विभाग के प्रमुख हरीश कुमार नाट्य संध्या में मुख्य अतिथि के रूप में पधारे व जानेमाने फिल्म अभिनेता निर्देशक आशीष नेहरा ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की। मुख्य अतिथि ने अपने अध्यक्षीय संबोधन में कलाकारों के सजीव अभिनय की सराहना करते हुए बीस मिनट के प्रहसन को सफलतापूर्वक एक घंटे की नाट्य प्रस्तुति में परिवर्तित करने व इस दिशा में सभी तरह की सावधानियां बरतने के लिए निर्देशक के काम को भी सराहा।। नाटक में उस समय के समाज में व्याप्त भ्रष्टाचार पर करारा व्यंग्य किया गया है। लोगों ने वर्तमान व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए महसूस किया कि भ्रष्टाचार और बौद्धिक दिवालियापन तो आज भी मौजूद है।
नाटक में चेले की मुख्य भूमिका निभाते हुए अविनाश सैनी ने दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया। डॉ. सुरेंद्र शर्मा ने गुरु, ललित खन्ना ने राजा और पान वाले विकास रोहिल्ला ने मंत्री की भूमिका बखूबी निभाई। जगदीप जुगनू ने कारीगर और सब्जीवाले की, उर्वशी विराट ने चेले की पत्नी, फूल वाली और फरियादन की व चारु ने नटी और नर्तकी की भूमिका अदा की। मिठाई वाला और भिश्ती की भूमिका में शक्ति सरोवर त्रिखा चने वाला, गडरिया और द्वारपाल की भूमिका में समीर शर्मा, द्वारपाल दो व कसाई के किरदार में मनीष खरे, कल्लू बनिया के रूप में अनिल शर्मा व कोतवाल की भूमिका में राहुल ने भी प्रभावित किया।
इससे पूर्व अंतर्राष्ट्रीय क्राफ्ट महोत्सव सूरजकुंड, पिचहत्तर दिवसीय राष्ट्रीय नाट्य समारोह अलवर रंगम, राष्ट्रीय नाट्य महोत्सव पटियाला, सीएसओआई दिल्ली सहित हिसार, झज्जर और महेंद्रगढ़ में इस नाटक के सफल मंचन हो चुके हैं।