रोहतक। शहर से जींद रोड पर करीब 12 किलोमीटर दूर स्थित कुंडू खाप के बड़े गांव टिटौली गांव का इतिहास सदियों पुराना है। ग्रामीण बताते हैं कि लगभग 800 साल पहले राजस्थान के ददरेवा से आए पूर्वजों ने टिटौली गांव बसाया था।
अब इस गांव की आबादी करीब 14000 है और 8000 मतदाता हैं जहां विभिन्न जातियों के लोग मिलकर गांव के विकास में योगदान दे रहे हैं। यह गांव अपनी समृद्ध सामाजिक एवं सांस्कृतिक विरासत के लिए भी जाना जाता है।
टिटौली गांव को देश भर के कुंडू गोत्र के लोगों का ''''दादा गाम'''' (मुख्य गांव) माना जाता है। हरियाणा व दूसरे प्रदेशों में रह रहे कुंडू खाप के लोग इसे अपने मूल स्थानों में से एक मानते हैं। गांव में दो पाने हैं जिनमें एक का नाम 8 पाना व दूसरे का 12 पाना है।
ग्रामीणाें का कहना गांव की कुल जमीन 20,000 बीघा थी जिसमें से एक पाने को 8,000 बीघा जबकि दूसरे को 12,000 बीघा जमीन मिली। इसी कारण इनके नाम 8 और 12 पाना कहे जाते हैं।
गांव के इतिहास को लेकर कुछ ग्रामीणों में एक अलग मत भी है। उनके अनुसार इसे धोबी का खेड़ा कहा जाता था लेकिन इसका कोई लिखित प्रमाण अब तक सामने नहीं आया है। टिटौली के ज्यादातर ग्रामीण राजस्थान के ददरेवा से उनके पूर्वजों के यहां आकर बसने पर ही सहमति जताते हैं।
आर्य समाज के प्रति ग्रामीणाें का खासा रुझान है। गांव में प्राचीन शिव मंदिर के अलावा दादी सती मंदिर और गुरु रविदास मंदिर सहित कुल पांच मंदिर हैं। संवाद
गांव का संक्षिप्त ब्योरा :
एक सरकारी व दो प्राइवेट स्कूल हैं।
तीन अखाड़े संचालित किए जा रहे हैं।
गांव में पंजाब नेशनल बैंक है।
दो प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र हैं।
गांव में एक पशु अस्पताल हैं।
विभिन्न जातियों की कुल 12 चौपालें हैं।
गांव में अलग-अलग सात जोहड़ हैं।
प्राचीन शिव मंदिर सहित कुल पांच धार्मिक स्थल हैं।
देश के लिए गांवों के दो वीरों ने शहादत दी है।
कुंडू खाप का सबसे बड़ा गांव
टिटौली गांव में अखिल भारतीय कुंडू खाप का भवन भी बना हुआ है। गांव निवासी जयप्रकाश, महासिंह, सतीश व रणबीर बताते हैं कि टिटौली से जाकर हिसार के पावड़ा, किनाला, जींद जिला में कालवा, पलवल में एलिका, पानीपत में शाहपुर, सोनीपत जिले में बुटाना, उत्तर प्रदेश के बागपत जिले में हेवा तक में कुंडू गोत्र के लोग बसे हुए हैं।
बुजुर्गों ने बताया था कि राजस्थान से आए पूर्वजों ने टिटाैली गांव बसाया था। गांव के लोगों का मुख्य व्यवसाय कृषि है।
- जयप्रकाश कुंडू
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कुंडू गोत्र बहुल इस गांव के विकास में सभी जातियों के लोग मिलजुलकर सहयोग कर रहे हैं। गांव की समृद्ध विरासत है।
- महासिंह कुंडू
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टिटौली गांव का इतिहास सदियों पुराना है। यहां एक पंचायत जबकि दो पाने हैं। गांव में 8000 मतदाता लोकतंत्र में भूमिका निभाते हैं।
- सतीश कुंडू
खेलों के प्रति युवाओं का खास रुझान बना हुआ है। गांव में तीन अखाड़े संचालित किए जा रहे हैं जहां युवा सुबह-शाम कसरत करते हैं।
- रणबीर सिंह
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टिटौली को धोबी का खेड़ा भी कहा जाता था। हालांकि, इसका कोई लिखित प्रमाण नहीं मिला है।
- मजीद
देशभर में कुंडू गोत्र का इकलौता बड़ा गांव है। आर्य समाज से यह सदियों से प्रभावित रहा है। युवाओं की रग-रग में बहादुरी है।
- जगत सिंह कुंडू
14-टिटौली गांव के इतिहास के विषय में चर्चा करते ग्रामीण। संवाद
14-टिटौली गांव के इतिहास के विषय में चर्चा करते ग्रामीण। संवाद