कृषि विभाग में काम कर रहे कृषि सुपरवाइजरों की सात माह पहले नियुक्ति हुई थी, अब तक उन्हें वेतन नहीं मिला है। एक सप्ताह पहले उन्हें 12800 रुपये दे दिए गए। पर अब तक यह स्पष्ट नहीं हुआ है कि यह उनका एक माह का वेतन है। पूछने पर अधिकारी कहते हैं कि रोहतक में डीसी रेट तय नहीं हुआ है, इसलिए उनका वेतन नहीं जारी हो पा रहा है।
विभाग ने सितंबर 2020 में जिले भर में 50 कृषि सुपरवाइजर नियुक्त किए थे। इन्हें तीन प्रमुख जिम्मेदारियां मेरी फसल, मेरा ब्योरा, क्रॉप बुकिंग और क्रॉप कटिंग एक्सपेरिमेंट की दी गई थीं। एक कंपनी के जरिये विभाग ने आउटसोर्सिंग के माध्यम से इन्हें नियुक्त किया था। इनमें से कुछ खेतीबाड़ी ग्रेजुएट थे तो कुछ नॉन एग्री ग्रेजुएट। सभी से कहा गया था कि उनका वेतन डीसी रेट के हिसाब से दिया जाएगा। सात माह से सभी विभाग में काम कर रहे हैं पर वेतन नहीं मिला। हरियाणा के अन्य जिलों में डीसी रेट तय हो गया, पर यहां नहीं हुआ। कई बार अधिकारियों से कहने के बाद भी उन्हें कोई जवाब नहीं मिला। 12 अप्रैल 2021 को उन्हें 12800 रुपये दिए गए पर अभी भी कुछ स्पष्ट नहीं है कि उनका वेतन कितना है और कब मिलेगा। इसके बाद कुछ सुपरवाइजरों ने विभाग को पत्र लिखा कि अगर जल्द उनका वेतन जारी न हुआ तो वे इस्तीफा दे देंगे। इस पत्र पर सुपरवाइजर सविता मलिक, विकास, आशू बधवार, सरिता, सुमित, विशाल, आशीष आदि के दस्तखत हैं। सुपरवाइजरों का कहना है कि वे अपने पास से पेट्रोल खर्च कर काम कर रहे हैं। सरकार के सबसे अहम तीन प्रोजेक्ट मेरी फसल, मेरा ब्योरा, क्रॉप बुकिंग और क्रॉप कटिंग एक्सपेरिमेंट की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। फिर भी विभाग को उनकी कोई परवाह नहीं है। जो 12800 रुपये उन्हें दिए गए हैं, वह तो श्रमिक के वेतन से भी कम है। जबकि, वे ग्रेजुएट और पोस्ट ग्रेजुएट हैं।
हाल ही में नए वित्त वर्ष का बजट आया था तो सुपरवाइजरों को राशि दी गई थी। जल्द ही उपायुक्त की अध्यक्षता में गठित कमेटी की बैठक होगी। इसमें डीसी रेट तय हो जाएगा, उसके बाद इनका वेतन जारी कर दिया जाएगा।
- डॉ. रोहताश सिंह, उप निदेशक कृषि