बेमौसमी बारिश और ओलावृष्टि के बाद हुई गिरदावरी में भेदभाव का आरोप लगाने वाले किसानाें को मुआवजे की संभावना को अब प्रदेश सरकार ने भी नकार दिया है।
प्रदेश के कृषि मंत्री ओमप्रकाश धनखड़ ने अब किसी भी प्रकार के मुआवजे से साफ इन्कार कर दिया है। शुक्रवार को रोहतक कैनाल रेस्ट हाउस पहुंचे कृषि मंत्री ने अमर उजाला से विशेष बातचीत में ये बात कही।
कृषि मंत्री धनखड़ ने हालांकि ये जरूर कहा कि जांच में गिरदावरी में भेदभाव करने वाले अफसराें पर कार्रवाई जरूर की जाएगी। फिर चाहे वो डीआरओ हो, या फिर पटवारी।
उन्हाेंने बताया कि सभी जिला उपायुक्ताें को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने स्तर पर जांच करके पता करें कि क्या पटवारियाें एवं अधिकारियाें ने कहीं पर भेदभाव किया या नहीं।
अगर जांच में कोई दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ उचित कार्रवाई करें। मुआवजे से इन्कार के सवाल पर उन्होंने कहा कि अब खेत में फसल खड़ी नहीं है, ऐसे में इस बात का अंदाजा लगाना संभव नहीं है कि किस किसान का कितना नुकसान हुआ था।
रोहतक में हुआ था एक लाख एकड़ जमीन पर नुकसान, 107 करोड़ का मुआवजा
रोहतक की अढ़ाई लाख एकड़ भूमि में से लगभग 1 लाख 5 हजार एकड़ पर नुकसान की बात जिला प्रशासन ने अपनी गिरदावरी रिपोर्ट में मानी थी। इसके लिए सरकार की ओर से 107 करोड़ रुपये बतौर मुआवजा जारी किया गया था।