छह माह की अवधि के लिए एजेंसी का होता है टेंडर
रोहित राठौर
रोहतक। शहर में टैंकर से पेयजल वितरण में खेल हो रहा है। टेंडर समाप्त होने के बाद भी एजेंसी पेयजल सप्लाई कर रही है। ऐसे में लोगों की पेयजल के बदले रुपये वसूली के आरोप पुख्ता होते नजर आ रहे हैं।
फिलहाल खुद विभाग एजेंसी को लेकर अस्पष्ट है। कितनी एजेंसी कहां पेयजल सप्लाई कर रही हैं इसका न कोई रिकॉर्ड है और न जानकारी। ऐसे में पेयजल टैंकर रोजाना हजारों लीटर पानी सप्लाई कर अपनी जेबें भर रहे हैं।
शहर के जलघरों में कम पानी होने की स्थिति से निपटने व जनता को पेयजल मुहैया कराने के लिए जनस्वास्थ्य विभाग ने निजी एजेंसियों को जिम्मेदारी सौंपी है। इसके लिए प्रभावित इलाकों के लिए जून-2025 से तीन टेंडर जारी गए हैं।
विभाग ने छह माह के लिए टेंडर एक ही एजेंसी को जारी किए हैं। नियमानुसा इस टेंडर को बाद में दो अन्य एजेंसियों को दे दिया गया। ऐसे में कुल तीन एजेंसियां शहर में पेयजल सप्लाई के लिए अधिकृत हो गईं। विभाग ने तीन माह बाद एक एजेंसी का टेंडर समाप्त कर दिया।
इसके बावजूद एजेंसी कैंटर सप्लाई जारी रखे हुए है। टेंडर समाप्त होने के बाद भी एजेंसी जलघर दो से लगातार पानी सप्लाई कर रही है। इधर, कॉलोनियों में टैंकर से पानी लेने वाले लोगों का कहना है कि रुपये लेकर पानी पी रहे हैं। इसके लिए कोई रसीद न ही पर्ची दी जाती है। सब काम कैश में होता है।
ऐसे में सवाल यह खड़ा हो रहा है कि आखिर कौन सी एजेंसी किस आधार पर जनता से सरकारी पानी का पैसा वसूल रही है। पानी के इस खेल में टैंकर चालकों ने कुछ दिन पहले जन स्वास्थ्य विभाग के टैंकर नहीं होने की बात कही थी।
शुक्रवार को इन्हीं चालकों ने टैंकरों को सरकारी बताया। चालकों ने बताया कि विभाग में तीन एजेंसियां काम कर रही हैं। टेंडर के अनुसार एजेंसी को छह महीने में एक टैंकर से 1925 टैंक पानी सप्लाई करने का अधिकार है। इसके लिए जनस्वास्थ्य विभाग एजेंसी को करीब 10 लाख रुपये देगी।
वर्जन
विभाग की ओर से पेयजल के तीन टेंडर दिए गए हैं। इनमें एक एजेंसी का टेंडर खत्म हो गया है। उस क्षेत्र में टैंकरों की व्यवस्था की जा रही है। विभाग के तहत सभी एजेंसियों को ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से टैंकर वितरण करना होता है। -संदीप कुमार, कार्यकारी अभियंता, जन स्वास्थ्य विभाग।