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पटना में बीबीवी 152 कोवैक्सीन के सफल परीक्षण पर पीजीआईएमएस ने लोकल स्क्रीनिंग के बाद 14 वालंटीयर के सैंपल आईसीएमआर भेजे

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ॉ. सविता वर्मा - फोटो : RohtakCity
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रोहतक। पटना में कोवैक्सीन बीबीवी 152 के सफल परीक्षण से उत्साहित पीजीआईएमएस भी जल्द ही रिसर्च शुरू करने जा रहा है। संस्थान ने लोकल स्क्रीनिंग के बाद 18 में से सफल हुए 14 वालंटियरों के सैंपल जांच के लिए आईसीएमआर (इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च) भेज दिए हैं। यहां से मंजूरी मिलते ही इन्हें शुरुआत में कोवैक्सीन की हल्की डोज दी जाएगी। कोरोना के संक्रमणकाल में चिकित्सा जगत को इस कोवैक्सीन के सफल होने का बेसब्री से इंतजार है। यदि यह ट्रायल सफल रहा तो कोरोना के संक्रमण से मानव को बचाने का मुख्य आधार बन जाएगी। रिसर्च में देश भर के 12 मेडिकल कॉलेजों में पीजीआईएमएस रोहतक को भी शामिल किया गया है। इस बारे में फार्माकोलॉजी विभाग एवं रिसर्च लीडर डॉ. सविता वर्मा ने बताया कि आईसीएमआर से मंजूरी मिलते ही हम भी कोवैक्सीन की डोज वालंटियर्स को दे देंगे। इस रिसर्च में जो भी बैरियर आ रहे थे वह हट चुके हैं।
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कोवैक्सीन की रिसर्च के लिए देश में सबसे पहले हामी भरने वाले पीजीआईएमएस रोहतक ने अपनी सभी तैयारियां पूरी कर ली है। 18 वालंटियर्स को शुरुआत में इसके लिए जांचा गया है और इसमें से 14 को सफल पाया है। इन वालंटियर्स को पहले वैक्सीन की हल्की और बाद में सामान्य डोज दी जाएगी और छह माह तक वालंटियर के शरीर में बनने वाली एंटीबाडी की संख्या देखी जाएगी। इसमें देखा जाएगा कि समय के साथ एंटी बाडी की संख्या बढ़ रही है या घट रही है। पहले चरण में 375 व दूसरे में 750 वालंटियर्स को रिसर्च में शामिल किया जाएगा। इसके लिए वालंटियर की आयु 18 से 55 वर्ष रहेगी। डॉ. सविता वर्मा के साथ इस रिसर्च में प्रदेश के प्रमुख नोडल अधिकारी कोविड डॉ. ध्रुव चौधरी व कम्यूनिटी विभाग के डॉ. रमेश वर्मा को-इंवेस्टिगेटर रहेंगे। इच्छुक व्यक्ति पीजीआईएमएस की कोविड हेल्पलाइन 9416447071 पर फोन करके ट्रायल का हिस्सा बनने के लिए अपना पंजीकरण करवा सकता है।
स्क्रीनिंग हो चुकी, सप्ताह में कर देंगे रिसर्च शुरू
कोवैक्सीन रिसर्च के को-इंवेस्टीगेटर डॉ. ध्रुव चौधरी ने बताया कि हमने कोवैक्सीन की रिसर्च के लिए वालंटियर्स की जांच कर ली है। इसके लिए आगे का प्रोसेस जारी है। लगभग सप्ताह में इस रिसर्च पर काम शुरू हो जाएगा। पटना, हैदराबाद, एम्स में इस पर काम शुरू हो गया है। हम भी इस पर काम शुरू कर देंगे।
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पटना में कोवैक्सीन की डोज दी जा चुकी है। हमने भी 14 वालंटियर के सैंपल आईसीएमआर को भेजे हैं। इनकी मंजूरी मिलते ही हम भी कोवैक्सीन की डोज दे देंगे। इस रिसर्च में जो भी बैरियर आ रहे थे वह हट चुके हैं। अब कहीं कोई समस्या नहीं है।
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- डॉ. सविता वर्मा, प्रोफेसर, फार्माकोलॉजी विभाग एवं रिसर्च लीडर, पीजीआईएमएस
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