बेरी। अक्षय तृतीया पर प्रशासन की बाल विवाह करने वालों पर पैनी नजर रहेगी। इस संबंध में अतिरिक्त उपायुक्त द्वारा सभी विभागों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने स्तर पर विशेष नजर रखें कि जिले में बाल विवाह न हों। जिला कार्यक्रम अधिकारी महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से अपने अधीनस्थ सभी स्कीमों के इंचार्जों को बाल विवाह को लेकर सघन अभियान चलाने के निर्देश जारी किए गए हैं। सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण झज्जर ने बैठक बुलाकर अभियान चलाने के निर्देश दिए। झज्जर में संरक्षण एवं बाल विवाह निषेध अधिकारी की ओर से सभी जिला परियोजना अधिकारियों व एमडीडी संस्था के साथ मिलकर बाल विवाह पर जागरूकता कार्यक्रम चलाया हुआ है। संरक्षण एवं बाल विवाह निषेध अधिकारी झज्जर करमिंद्र कौर ने बेरी स्थित माता भीमेश्वरी देवी मंदिर में पुजारी से मिलकर कानून की जानकारी दी और अपील की है कि सभी अनुयायियों को बाल विवाह न करने के लिए प्रेरित करें। प्रिंटिंग प्रैस व ब्यूटी पार्लरों में भी महिलाओं को बाल विवाह निषेध कानून के बारे में जानकारी दी गई। बताया गया कि बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 के अनुसार 18 साल से कम उम्र की लड़की और 21 साल से कम लड़के को नाबालिग माना जाता है। 18 साल से कम उम्र की लड़की और 21 साल से कम उम्र के लड़के का विवाह करना संज्ञेय और गैर जमानती अपराध है। ऐसा कोई भी व्यक्ति जो बाल विवाह करवाता है, उसको बढ़ावा देता है या उस में सहायता करता है, उसको दो साल तक की कड़ी सजा और एक लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है।
बाल विवाह के कुल मामले
वर्ष 2023-24 में झज्जर जिले में बाल विवाह की 4 शिकायतें आई। इनमें से 2 स्थगित करवा दी गई। एक मामले में जीरो एफआईआर करवाकर मामले को राजस्थान भेजा गया। चौथे मामले में शिकायत गलत पाई गई। चालू वर्ष में बाल विवाह से संबंधित एक ही शिकायत आई, जिसे मौके पर जाकर रुकवा दिया गया।