63वें नेशनल फिल्म अवार्ड में ‘सतरंगी’ को सर्वश्रेष्ठ हरियाणवी फिल्म चुना गया है। इस फिल्म से रोहतक की बेटी नरगिस नांदल और हिसार के यशपाल शर्मा को अभिनय के क्षेत्र में अलग पहचान मिली है। फिल्म में दोनों ने बाप और बेटी के रिश्ते को बखूबी निभाया है। अब 3 मई को दिल्ली में होने वाले समारोह में ‘सतरंगी’ की टीम को राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी सम्मानित करेंगे।
जाट कॉलेज कैंपस में रह रही अभिनेत्री नरगिस इस उपलब्धि से फूली नहीं समा रही हैं। उन्होंने बताया कि शुरुआत अच्छी है, लेकिन अभी मंजिल तक पहुंचना बाकी है। अभी यह फिल्म बड़े पर्दे पर नहीं आई है, इसे रीजनल फिल्म अवार्ड के लिए भेजा गया था। पर, जुलाई या अगस्त में रिलीज होेने की संभावना है। इसके बाद बॉलीवुड फिल्मों की दौड़ में शामिल होऊंगी।
रूढ़िवादी सोच पर चोट करती है ‘सतरंगी’
नरगिस ने बताया कि ‘सतरंगी’ एक हरियाणवी फिल्म है, जो प्रदेश के लोगों की लड़की को लेकर रूढ़िवादी मानसिकता और उसके संघर्ष पर केंद्रित है। बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ के उद्देश्य को लेकर बनी इस फिल्म में उनके पिता का रोल अभिनेता यशपाल शर्मा ने निभाया है। फिल्म में दिखाया गया है कि मां के मर जाने के बाद पिता किस तरह अपनी जिम्मेदारी को निभाता है।
मां का सपना था कि दोनों बच्चों को अच्छी तालीम मिले। इस सपने को पूरा करने के लिए पिता को आगे आता है लेकिन समाज आड़े आ जाता है। समाज की रूढ़िवादी सोच पिता को मजबूर करता है कि वह अपनी बेटी को घर पर बिठाए और उसकी शादी कर दे। लेकिन पिता सभी बेड़ियों को तोड़कर अपनी बेटी को पढ़ाता है। जहां बेटी ने पढ़ने-लिखने के बावजूद अपने मूल्यों को नहीं छोड़ा है, वहीं बेटा नालायक निकलता है।
मां जाट कॉलेज में इंग्लिश लेक्चर, पिता करते हैं वकालत
नरगिस की मां मुनीष नांदल जाट कॉलेज में इंग्लिश की लेक्चर हैं। वे बेटी की इस उपलब्धि पर बेहद खुश हैं। नरगिस 2012 से प्रोफेशनल थिएटर कर रही है। इसके साथ ही वर्ल्ड कप, बीएसएनएल और हीरो होंडा सहित कई नामी कंपनियों के लिए विज्ञापन कर चुकी है। एक साल पहले ही मॉडलिंग में करिअर की शुरुआत की है। नरगिस के पिता सुधीर नांदल एडवोकेट हैं तो भाई साकेत क्रिकेटर है।
कालवा में हुई 16 दिन शूटिंग
सतरंगी फिल्म की ज्यादातर शूटिंग जींद के कालवा गांव में की गई है। गांव में 16 दिन तक चली शूटिंग में ग्रामीण पृष्टिभूमि को अच्छे से दिखाया गया है।