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चंडीगढ़ में पीजी में आगजनी से तीन की मौत के बावजूद नहीं जागा प्रशासन

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रोहतक। पीजी यानी पेइंग गेस्ट। ऐसा मेहमान जो रुपये देकर किसी के घर में रहता है। स्पर्धा के दौर में तेजी से बढ़ते शहरीकरण में यही बाहरी लोगों का निवास है। इसमें पढ़ने-लिखने, खेलने-कूदने, कोचिंग, नौकरी पेशा लोग शामिल हैं। इनकी जरूरत के लिए शहरवासियों ने अपने निवास को पीजी में बदल लिया है। इसकी न तो नगर निगम या प्रशासन से मंजूरी ली गई है और न ही दमकल विभाग से एनओसी। शहर के देव कॉलोनी, माडल टाउन, मेडिकल मोड़ के पास, प्रेम नगर, दुर्गा कॉलोनी, बाबा मस्तनाथ नगर समेत कई स्थानों पर अवैध रूप से चल रहे पीजी की संख्या करीब 450 है। इनसे में 200 को तो निगम प्रशासन नोटिस भी जारी कर चुका है। इसके बावजूद पीजी धड़ल्ले से चल रहे हैं। ऐसे में यदि गुजरात या चंडीगढ़ की तरह कहीं कोई आगजनी या हादसा हुआ तो बड़ी जनहानि से इनकार नहीं किया जा सकता है। बता दें कि शुक्रवार को चंडीगढ़ में पीजी में आगजनी होने से तीन छात्राओं की मौत हो गई है।
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छोटे-छोटे कमरों में रह रहे तीन से पांच लोग
शहर में अवैध पीजी का खेल धड़ल्ले से जारी है। छोटे-छोटे घरों में ये पीजी चल रहे हैं। यही नहीं इनके छोटे-छोटे कमरों में तीन से पांच लोग रहते हैं। बेहद तंग कमरों को प्लाई या एल्युमीनियम की दीवार के जरिये केबिनों में बांटा गया है। इनमें केवल सोया जा सकता है। सामान रखने के लिए अलमारी भी मुहैया कराई जाती है।
गर्मी में पंखे या कूलर के सहारे
छोटे-छोटे तंग कमरों के पीजी में रहने वाले गर्मी में पसीने से तरबतर रहते हैं। इसकी वजह इनमें वेंटिलेशन का नहीं होना है। गर्मी से राहत के लिए पंखे ही होते हैं। कूलर लगाने पर उमस यहां रहने वालों की मुश्किल और बढ़ा देता है।
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हादसे से बचने के उपाय न साधन
अवैध रूप से चल रहे पीजी जीवन की सुरक्षा के लिहाज से बेहद खतरनाक हैं। यहां यदि कोई अनहोनी या हादसा हो जाए तो इससे बचने के उपाय ही नहीं है। इसमें खिड़की दरवाजे व बाहर निकलने का रास्ता अहम है। बचाव के साधनों का भी अभाव है। इसमें अग्निशमन यंत्र व अन्य उपाय शामिल हैं। भूकंप सरीखे हादसों में यहां और भी मुश्किल हालात पैदा हो सकते हैं। इन तंग पीजी में बचाव या राहत कार्य चलाना बचाव टीम के लिए चुनौतीपूर्ण रहेगा।
पीजी चलाने के नियम न कानून
देश में लगभग कर काम या बात के नियम-कानून हैं। पीजी चलाने को लेकर प्रदेश में कोई स्पष्ट नियम या कानून नहीं हैं। पीजी शुरू करने के लिए क्या जरूरी है, क्या नहीं। क्या सुविधा दी जाए, क्या नहीं, यह अपने आप में सवाल है। नगर निगम प्रशासन की मानें तो पीजी व्यावसायिक हैं। ऐसे में शहरी या आबादी क्षेत्र में इन्हें नहीं खोला जा सकता है। इसके लिए अनुमति लेने के साथ शुल्क भी चुकाना होता है।
भेजे जा चुके हैं नोटिस
पीजी चलाने के लिए मंजूरी लेना जरूरी है। यह व्यवसायिक श्रेणी में आता है। इसके लिए नक्शा पास कराने, दमकल विभाग से एनओसी लेने सरीखी कई प्रक्रियाओं से गुजरना होता है। नगर निगम अवैध पीजी को लेकर पूरी तरह सख्त है। इसी कड़ी में 200 पीजी को नोटिस भेजा जा चुका है। फिलहाल बड़े पीजी टारगेट पर हैं। इसके बाद छोटे पीजी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। पीजी संचालक 31 मार्च तक मंजूरी लेंगे। इसके बाद दूसरे नोटिस की प्रक्रिया पूरी होते ही पीजी सील किए जाएंगे।
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- प्रदीप गोदारा, आयुक्त, नगर निगम।
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