मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के साथ रविवार को दिल्ली में आशा वर्कर्स यूनियन के प्रतिनिधिमंडल के साथ हुई बातचीत विफल रही।
बैठक
में शामिल आशा वर्करों ने आरोप लगाया कि सीएम ने उनकी बात ठीक ढंग से सुनी
तक नहीं और उनसे दुर्व्यवहार करते हुए बाहर तक जाने को कह दिया। आशा
वर्करों ने इसके विरोध में आपातकालीन बैठक कर पूरे प्रदेश में आंदोलन करने
का ऐलान किया। प्रदेश महासचिव सुरेखा ने बताया कि तीन दिसंबर को प्रदेश के
सभी जिला मुख्यालय पर प्रदर्शन करके सीएम का पुतला फूंका जाएगा।
प्रदेश
भर की आशा वर्करों ने शनिवार को रोहतक में रोष प्रदर्शन किया था। इस दौरान
अधिकारियों ने उन्हें रविवार को दिल्ली में सीएम से मिलाने का आश्वासन
दिया था। इसी के तहत आशा वर्करों का सात सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल सुबह 10.30
बजे दिल्ली में मुख्यमंत्री से मिला। प्रदेश महासचिव सुरेखा ने बताया कि
सीएम ने उनकी कोई मांग नहीं मानी। उन्होंने न्यूनतम वेतन दस हजार करने की
अपील की थी, लेकिन सीएम ने उनकी बात को सुना तक नहीं।
प्रतिनिधिमंडल का
आरोप है कि मुख्यमंत्री ने उनसे ठीक ढंग से बात तक नहीं की। यहां तक कि
मुख्यमंत्री ने उनकी मांगों को अनसुना करते हुए बाहर जाने को कहा।
प्रतिनिधिमंडल
का आरोप है कि मुख्यमंत्री का व्यवहार गैर जनतांत्रिक एवं तानाशाहीपूर्ण
रहा। मुख्यमंत्री का इस तरह का व्यवहार किसी भी तरह से बर्दास्त नहीं किया
जाएगा। इसके बाद आशा वर्करों ने आपातकालीन बैठक बुलाई और निर्णय लिया कि
मुख्यमंत्री के व्यवहार के खिलाफ प्रदेश भर की आशा वर्कर तीन दिसंबर को
जिला मुख्यालय पर मुख्यमंत्री का पुतला फूंकेंगी। साथ ही विधायकों के घर
एक-एक कोटरी आटा भी पहुंचाएगी और उस आटे को मुख्यमंत्री तक पहुंचाने की
मांग करेगी।