आधार कार्ड का लक्ष्य भले ही 90 फीसदी के पार पहुंच गया है।
पर, ‘डुप्लीकेसी’ 100 फीसदी लक्ष्य पाने की राह में रोड़ा बन गई है।
इसके पीछे मुख्य वजह निजी एजेंसियों के कर्मचारियों द्वारा आधार में मोबाइल नंबर नहीं दिया जाना है।
इसके चलते दो साल बाद भी लोगों के पास आधार कार्ड नहीं पहुंचे हैं।
इसके लिए सरकार ने ‘एडवांस सर्च’ सॉफ्टवेयर में बदलाव किए हैं, जो लापता आधार को ढूंढने में मदद करेगा।
‘डुप्लीकेसी’ खत्म करने का बीड़ा एनआईसी ने उठाया है। इसके लिए गठित टीम अगले एक माह में गांव-गांव जाकर कैंप लगाएगी। टीम सोमवार को फरमाणा खास में आधार कार्ड में सुधार करने जाएगी।
बुजुर्गों को राहत
नया सॉफ्टवेयर ‘एडवांस सर्च’ के तहत बुजुर्गों को विशेष तौर से राहत दी गई है। इसमें बुजुर्गों को दस्तावेज लेकर आधार कैंप में जाने की जरूरत नहीं है। उनके परिजन दस्तावेज लेकर पहुंच सकते हैं। पहले वाले सॉफ्टवेयर में संबंधित व्यक्ति की मौजूदगी जरूरी थी।
‘डुप्लीकेसी’ की ये वजह
एजेंसियों की ओर से बनाए गए 40 फीसदी आधार कार्ड में मोबाइल नंबर नहीं दिया गया। यही नहीं नाम, घर का पता, जन्मतिथि भी गलत अंकित की गई। ज्यादातर आधार कार्ड में तो ‘पिन कोड’ भी गलत भरे गए। किसी भी जिले का ‘पिनकोड’ आधार कार्ड का जनरेट नंबर होता है। जब छह माह के बाद भी लोगों के पास आधार कार्ड नहीं पहुंचे तो उन्होंने नए सिरे से आधार कार्ड बनवा लिए। इस वजह से ‘डुप्लीकेसी’ बढ़ी और आधार कार्ड के आवेदन रिजेक्ट होने लगे।
जिले के 147 गांवों में आधार कैंप का काम सोमवार से शुरू होगा। केंद्र सरकार की ओर जितनी भी आनलाइन सेवाएं और कंप्यूटर शिक्षा योजना शुरू की जा रही है। उन सबके लिए आधार कार्ड अनिवार्य है। जिस भी गांव में आधार कैंप लगेगा। उसके लिए सरपंच की ओर से मुनादी भी करवाई जाएगी।
मनीष गुप्ता, जिला सूचना विज्ञान अधिकारी, एनआईसी रोहतक।