विजेंद्र कौशिक
रोहतक। आठ साल पहले ट्रैक्टर की टक्कर से घायल महम निवासी (24) आशीष कुमार को ट्रैक्टर चालक, मालिक व बीमा कंपनी मिलकर 30 लाख रुपये मुआवजा 9 प्रतिशत ब्याज सहित दे। 80 प्रतिशत दिव्यांग होने से शादी के लिए रिश्ता नहीं आ रहा। इसके लिए भी दो लाख रुपये दिए जाए जो कुल राशि में ही शामिल है।
मोटर वाहन ट्रिब्यूनल की अध्यक्ष एवं एएडीजे रजवी यादव ने यह निर्णय दिया है। तीन माह में पीड़ित के बैंक अकाउंट में राशि आ जाए, नहीं तो ब्याज लगेगा।
महम के वार्ड नंबर दो निवासी आशीष ने 2019 में जिला मोटर वाहन ट्रिब्यूनल में सड़क किनारे हुई दुर्घटना में लगी चोटों के लिए याचिका दायर कर ब्याज सहित 50 लाख का मुआवजा मांगा था। याचिकाकर्ता ने बताया था कि 13 फरवरी 2018 को वह अपने व चचेरे भाई के साथ रोहतक से महम बाइक पर जा रहा था।
रास्ते में मदीना गांव की तरफ से आ रहे ट्रैक्टर चालक ने बाइक को टक्कर मार दी थी। इससे वह गंभीर रूप से घायल हो गए। उसने ट्रिब्यूनल को बताया कि वह छात्रों को ट्यूशन पढ़ाकर 30,000 रुपये प्रति माह कमाते थे। दुर्घटना के बाद वह हिलने-डुलने में असमर्थ और पूरी तरह से अक्षम हो गए।
उपचार के लिए 20 लाख रुपये खर्च हो चुके हैं। साथ में दूसरे खर्च भी हैं। ट्रैक्टर चालक मदीना गांव निवासी सतीश, ट्रैक्टर मालिक सुनीता व इंश्योरेंस कंपनी से 50 लाख रुपये मुआवजा दिलवाया जाए। ट्रिब्यूनल ने दोनों पक्षों की सुनवाई करते हुए फैसला दिया है कि याचिकाकर्ता को 30 लाख 16 हजार 621 रुपये मुआवजा दिया जाए।
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यूं तय की टिब्यूनल ने मुआवजा राशि
: कमाई की हानि के लिए 9837
: चिकित्सा व्यय के लिए 14,35,639
: स्थायी दिव्यांग होने पर 12,74,875
: परिवहन शुल्क के लिए 45,900
: दर्द और पीड़ा के लिए 40,000
: विशेष आहार के लिए 10,000
: विवाह होने में दिक्कत पर 2,00000
कुल राशि 30,16,251
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ब्याज सहित संयुक्त तौर पर दें या अलग-अलग
ट्रिब्यूनल ने कहा है कि चालक, ट्रैक्टर मालिक व बीमा कंपनी क्षतिपूर्ति राशि देने के लिए उत्तरदायी हैं। तीनों अलग-अलग भुगतान करें या संयुक्त तौर पर। बीमा कंपनी बीमा कंपनी को निर्देश दिए जाते हैं कि तीन माह में याचिकाकर्ता के बैंक खाते में राशि जमा हो जाए। जमा न होने पर नौ प्रतिशत ब्याज लगेगा।