मेले में आए हुए घोडे़। फोटो-संवाद
बेरी (झज्जर)। नवरात्र पर हर साल बेरी के कलानौर मार्ग पर पशु मेला लगता है। इसे गधों का मेला नाम से जाना जाता है। यहां प्रदेश के अलावा उत्तर प्रदेश व राजस्थान के पशु व्यापारी भी आते हैं। पूर्व के मेलों की तुलना में इस बार का राैनक थोड़ी कम रही। खास बात यह रही कि गधों के मेले में सबसे महंगी डेढ़ लाख की घोड़ी बिकी है। गधों के मेले में अब घोड़े व घोड़ियों की संख्या बढ़ती जा रही है। वहीं इस बार मेले में एक भी गधा दिखाई नहीं दिया। सोमवार को अमृतसर में पशु मेले का आयोजन था, इसके चलते पंजाब के पशु व्यापारी यहां नहीं पहुंचे।
कलानौर मार्ग पर लगने वाले पशु मेले में इस वर्ष काफी कम पशु व पशु व्यापारी पहुंचे। इस बार सबसे महंगी घोड़ी एक लाख 50 हजार रुपये की बिकी। इस मेले में महंगे घोड़े-घोड़ियां ही आकर्षण का केंद्र बनते हैं। सामान्य तौर पर यहां इनकी खरीद कम होती है। इन्हें प्रदर्शन के लिए लाया जाता है और कीमत लाखों की बताई जाती है। इनको न बेचने का कारण नस्ल सुधार के लिए इनको फार्म हाउस में रखना बताया जाता है। मंगलवार को माता भीमेश्वरी देवी के मेले के साथ ही गधों के नाम से विख्यात पशु मेला भी समाप्त गया। बीडीपीओ कार्यालय की तरफ से लेखाकार अनिल ने बताया कि मेले में करीब 130 पशुओं की खरीद हुई और करीब 2 लाख रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ।