माई सिटी रिपोर्टर
रोहतक। शहर के सेक्टर-14 स्थित एग्रो मॉल के अलॉटियों के लिए राहत भरी खबर है। मॉल की अलॉट साइट नहीं रखने के इच्छुक लोगों को जमा की गई राशि ब्याज सहित वापस की जाएगी। मुख्यालय में हुई कैबिनेट की बैठक में यह फैसला लिया गया है।
सोमवार को एग्रो मॉल के अलॉटियों को राहत देते हुए कैबिनेट ने उनकी अपील से जुड़े प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। एग्रो मॉल लगभग 38 कनाल व 15 मरला के प्लॉट पर विकसित किया गया था। इसमें 282 दुकानें हैं, इनमें से 78 अलॉट हो गईं।
अलॉट की गई साइट को अपने पास नहीं रखना चाहते, उन्हें जमा की गई रकम, जमा करने की तारीख से पेमेंट तक सात फीसदी सालाना ब्याज के साथ वापस की जाएगी। जो अलॉटी दुकानें रखना चाहते हैं, उन्हें बोर्ड की पिछली स्कीम यानी विवादों का समाधान-दो के तहत बकाया रकम जमा करने की अनुमति होगी। ऐसा नहीं होने पर दुकान नियमों के हिसाब से वापस ले ली जाएगी।
एग्रो मॉल के दुकान मालिकों ने अमित शाह को सौंपा था ज्ञापन
एमडीयू के सामने स्थित एग्रो मॉल में बनीं दुकानों के खरीदारों ने भाजपा अध्यक्ष अमित शाह को वर्ष 2017 में उनके रोहतक आगमन पर ज्ञापन सौंपा था। दुकान मालिकों ने ज्ञापन में कहा था कि उन्हें सरकार ने ठगा है। मॉल बनते समय सपने उन्हें दिखाए गए थे। इनमें से कोई भी पूरा नहीं हो सका। उनकी खरीदी सभी दुकानें चार साल से खाली पड़ी हैं। इससे पूंजी खराब हो गई है।
एग्रो मॉल शॉप एसोसिएशन के तत्कालीन प्रधान उदय सिंह फौगाट ने ज्ञापन में कहा था कि वर्ष 2012 में सरकार ने 100 करोड़ की लागत से मॉल तैयार किया। मार्च 2013 में तत्कालीन मुख्यमंत्री ने एग्रो मॉल का उद्घाटन कर कई सपने दिखाए।
हरियाणा स्टेट एग्रीकल्चर मार्केटिंग बोर्ड के तहत बनाए मॉल की दुकानें बेचने के लिए सरकार ने विज्ञापनों में बताया कि यहां मल्टीप्लेक्स और एमएनसी कंपनियों के दफ्तर खुलने वाले हैं। यहां 40 प्रतिशत दुकानें सरकार खुद खोलेगी।
इस तरह की बातें सुनकर लोगों ने महंगी बोलियां लगाकर दुकानें बुक करा लीं। पहली बोली में 32 दुकानें बिकीं। इसके बाद की कई अन्य बोलियों से कुल 78 दुकानें बिकीं। इसके बाद मॉल में कोई विकास न देखकर लोगों ने हाथ खींचने शुरू कर दिए।