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Rohtak News: फैक्टर-8 नहीं मिलने से हीमोफीलिया पीड़ित की तबीयत बिगड़ी, दिल्ली के अस्पताल में मौत

Wed, 28 Jan 2026 02:40 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
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45...अजय शर्मा, अध्यक्ष, हीमोफीलिया सोसाइटी रोहतक - फोटो : Samvad
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रोहतक। पीजीआई में हीमोफीलिया पीड़ितों को राहत नहीं मिल रही है। यहां फैक्टर-8 खत्म होने के कारण मरीजों को दिल्ली जाना पड़ रहा है। इसी कड़ी में समय पर इलाज नहीं मिलने के कारण शहर के जींद बाईपास निवासी रविंद्र (38) की 22 जनवरी को मौत हो गई। वह दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में उपचाराधीन थे। परिजनों ने इलाज में देरी को मौत की वजह बताया है।
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शिव कॉलोनी निवासी नवीन का आरोप है कि उनके भाई रविंद्र किराये पर कार चलाते थे। वह हीमोफीलिया से पीड़ित थे। उनकी दो बेटियां व एक बेटा है। उनके हाथ पांव 19 जनवरी को गाड़ी चलाते समय अचानक सुन्न हो गए थे। इस पर पत्नी को फोन कर बताया। हालत गंभीर होने के चलते एक दोस्त ने उन्हें घर छोड़ा। इसके बाद परिजन उन्हें सिविल अस्पताल ले गए। यहां जांच के बाद पीजीआई रेफर कर दिया गया।
दोपहर करीब 12 बजे पीजीआई पहुंचने पर रविंद्र के खून की जांच व सीटी स्कैन किया गया जिसकी रिपोर्ट शाम करीब पांच बजे आई। इसमें दिमाग से जुड़ी समस्या बताई गई व न्यूरोलॉजी विभाग से इलाज कराने की सलाह दी गई।
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आरोप है कि इसके बाद डेढ़ घंटे तक कोई न्यूरोलॉजी चिकित्सक इमरजेंसी में नहीं आया। मरीज को खून की उल्टियां हो रही थीं। परिजनों ने बार-बार इमरजेंसी स्टाफ से हीमोफीलिया फैक्टर-8 लगाने की मांग की। इस पर उन्हें वार्ड तीन में भेज दिया गया।
वार्ड में भी चिकित्सकों ने फैक्टर-8 उपलब्ध नहीं होने की बात कहकर लगाने से इन्कार कर दिया। मजबूरन परिजन घर से इमरजेंसी के लिए रखे 500 यूनिट के दो फैक्टर-8 ले आए।
दो फैक्टर-8 लगाने के बाद भी मरीज को राहत नहीं मिली। यहां करीब तीन घंटे बाद न्यूरोलॉजी के एक चिकित्सक पहुंचे। उन्होंने मरीज की हालत देखकर कुछ भी स्पष्ट नहीं बताया। उन्होंने कहा कि इसके दिमाग की नस फट चुकी है। परिजनों ने रेफर करने की मांग की।
इस पर रेफरल दस्तावेज देने से मना कर दिया। मजबूरी में 19 जनवरी को ही रात करीब 10 बजे
मरीज को बिना रेफर दस्तावेज के निजी एंबुलेंस से दिल्ली एम्स ले जाया गया। यहां पहुंचने में दो घंटे से अधिक समय लगा। रेफर के कागजात नहीं होने के कारण एम्स में इलाज से इन्कार कर दिया।
बाद में परिजन उन्हें नई दिल्ली स्थित सरकारी अस्पताल ले गए। यहां उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया। चिकित्सकों ने बताया कि दिमाग में ज्यादा खून जम चुका था। इस कारण रविंद्र की मौत हो गई।

जिले में हैं 46 हीमोफीलिया मरीज, 41 को फैक्टर-8 की आवश्यकता
पीजीआई मेंं करीब एक साल से फैक्टर-8 की कमी बनी हुई। जिले में 46 हीमोफीलिया मरीज हैं। इनमें से 41 मरीजों को फैक्टर-8 की आवश्यकता है। इसकी सबसे ज्यादा जरूरत रहती है। हर माह दो से तीन बार मरीज को फैक्टर-8 लगवाना पड़ता है। इसके लिए पीजीआई निदेशक को भी कई बार पत्र सौंपा गया है। यह एक लाइफ सेविंग ड्रग है। इसकी कमी के कारण रविंद्र की जान गई है। फैक्टर की व्यवस्था जल्द होनी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों। बड़े लोगों को छह फैक्टराें की आवश्यकता होती है।
- अजय शर्मा, अध्यक्ष, हीमोफीलिया सोसाइटी रोहतक

संस्थान में कुछ फैक्टर नहीं हैं। इनकी खरीद प्रक्रिया जारी है। मरीज को फैक्टर नहीं लगने या उसकी मौत के मामले की जांच की जाएगी। जांच में दोषी मिलने वाले के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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- डॉ. एसके सिंघल, निदेशक, पीजीआईएमएस

45...अजय शर्मा, अध्यक्ष, हीमोफीलिया सोसाइटी रोहतक- फोटो : Samvad

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