सिरसा। एक युवती ने प्रेम विवाह करने के बाद पति के खिलाफ जबरन शादी करने का मुकदमा दर्ज कराया था। यह मामला अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश आरके मेहता की अदालत में चल रहा था, लेकिन महिला अपने बयान से पलट गई और उसने शिकायत वापस ले ली है। इसके बाद कोर्ट ने आरोपी को बरी कर दिया।
मामले के अनुसार रानियां थाना के गांव भडोलियावाली निवासी रमनदीप कौर ने 17 सितंबर 2012 को रानियां थाना में गांव मंगालिया निवासी सौरभ मेहता के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाई थी वह हिसार स्थित एक प्राइवेट शिक्षण संस्थान में बीटेक की छात्रा थी तथा उसे छह जुलाई 2012 को सौरभ ने उसे कुछ सुंघा दिया। होश में आने पर उसने खुद को हिसार के एक मंदिर में पाया। मंदिर में सौरभ के साथ उसके दो दोस्त भी थे। आरोप था कि सौरभ ने पिस्तौल के बल पर जान से मारने की धमकी देकर शादी की थी। रमनदीप कौर ने आरोप लगाया था कि सौरभ मेहता ने उसका नाम बदलकर सरबजीत कौर के नाम से शादी का प्रमाण पत्र बनवाया था। पुलिस ने केस दर्ज कर आरोपी को जेल भेज दिया था। जेल से जमानत पर छूटने के कुछ माह बाद ही रमनदीप कौर पत्नी के रूप में सौरभ के साथ रहने लगी। उसने अदालत में बयान दिया कि सौरभ और उसने मंदिर में प्रेम विवाह किया था। शनिवार को सौरभ पत्नी रमनदीप कौर के साथ अदालत पहुंचा। महिला ने पति के पक्ष में बयान दिया। सुबह बचाव पक्ष व सरकारी वकील के बीच महत्वपूर्ण बहस हुई और बाद में अदालत ने जबरन शादी करवाने के आरोपी सौरभ को बरी कर दिया।