रोहतक। बाबा मस्तनाथ विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. मारकन्डे आहूजा ने कहा कि व्यक्ति जीवन में सफलता के अहसास को तब तक नहीं समझ पाता जब तक उसके अंदर सफलता को पाने में आई विपरीत परिस्थितियों के प्रति समभाव पैदा न हो। वे बुधवार को विश्वविद्यालय के इंजीनियरिंग विभाग में एकलव्य पर आयोजित एक संगोष्ठी में बोल रहे थे।
डॉ. आहूजा ने कहा कि वास्तव में एकलव्य मैनेजमेंट विभाग द्वारा रिसर्च का मुद्दा होना चाहिए क्योंकि व्यक्ति निर्माण, साहस एवं गुरु भक्ति का यह चरित्र इतिहास के पन्नों में छिपा हुआ है। एकलव्य ने गुरु के मना करने के बाद भी अपने दृढ़ निश्चय एवं संकल्प से धनुर्विद्या में महारत हासिल की। इसके बाद गुरु के कहने मात्र से अपने अंग का दान दे दिया। इस अवसर पर डॉ. अंजू आहूजा, डॉ. कमलेश मलिक, डॉ. विनोद कुमार, डॉ. अजय बांबा, डॉ. देवेंद्र सिंह, डॉ. जितेंद्र खुराना, डॉ. पूजा बुद्धिराजा, विनय बत्तरा, डॉ. एसपी शर्मा, डॉ. प्रदीप श्रीवास्तव, डॉ. शुभम गांधी और सन्नी गांधी आदि मौजूद रहे।