रोहतक। अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति के जिला अध्यक्ष धर्मपाल हुड्डा ने कहा कि मंडल कमीशन ने अपनी रिपोर्ट में जाटों को पहले पिछड़े वर्ग में शामिल कर आरक्षण देने की सिफारिश की थी। किसी कारणों के चलते उस सिफारिश को उस समय नजरअंदाज कर दिया गया। इसके कारण आज जाटों को अपने संवैधानिक अधिकार के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।
वे सोमवार को छोटूराम पार्क में अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति की बैठक में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि गत 5 जुलाई को दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में जाट महासम्मेलन में मुख्यमंत्री भूपेन्द्र सिंह हुड्डा ने अपने को जाटों का सिपाही कहने पर पूर्व विधायक सुभाष बत्तरा व कई अन्यों द्वारा उनके विरुद्ध दिया गया बयान उनकी सीमित सोच का परिचायक है। उन्होंने कहा कि शायद उनको नहीं पता कि हर जाट पहले अपने को कौम व राष्ट्र का सिपाही मानता है इसके बाद दूसरी बातें आती हैं। उन्होंने कहा कि ऐसा लगता है कि सुभाष बत्तरा अभी भी कुलदीप बिशभनोई की जाट और गैर जाट की भाषा बोल रहे हैं तथा उनकी सोच अभी बदली नहीं है।
बैठक में महासचिव कैप्टन जगवीर मलिक, रिसलदार चांदराम, रामबीर नांदल, वेदपाल हुड्डा, बिजेन्द्र मलिक, हरेन्द्र हुड्डा, उदयभान मलिक, रामप्रकाश दलाल, बलवन्त सिंह, जगवीर हुड्डा, रणवीर मलिक, बलवन्त चमारिया, सुरजीत बल्हारा, डॉ. दिनेश, सुखबीर हुड्डा, रामप्रकाश दलाल, जागेराम, लाखपत, चरण सिंह, बलदेव सिंह, सतपाल बल्हारा सहित सभी कार्यकारिणी सदस्य मौजूद रहे।